अंबेडकरनगर। जिले में भाजपा को मिली करारी शिकस्त के बाद आरोप प्रत्यारोप के साथ अंतर्विरोध का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा। पार्टी के संगठन से जुड़े पदाधिकारी हार का ठीकरा एक दूसरे पर फोड़कर उनकी खामियों को उजागर करने में जुटे हैं। चौकाने वाली बात यह रही कि भाजपा के टांडा प्रत्याशी कपिलदेव अपने ही बूथ पर जीत हासिल नहीं कर पाए। कई और भाजपा नेताओं के भी अपने बूथों पर न जीत पाने का मामला अब तूल पकड़ता नजर आने लगा है। चुनाव परिणामों की समीक्षा बाद तैयार इस रिपोर्ट को जल्द ही पार्टी नेतृत्व के समक्ष रखा जाएगा।
विधान सभा चुनाव के दौरान भाजपा को जिले की सभी पांचों सीटों पर करारी हार का सामना करना पड़ा है। इससे पूर्व 2017 के चुनाव में पार्टी टांडा व आलापुर सीट पर जीत हासिल करने में सफल हुई थी। टिकट बंटवारे के समय से ही भाजपा में चल रही गुटबाजी खुलकर सामने आने लगी थी। इसके चलते ही भाजपा ने इस बार चुनाव में अपने दोनों मौजूदा विधायकों का टिकट काट कर नए प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था।
आलापुर में जहां विधायक अनीता कमल का टिकट काटकर उनके ससुर त्रिवेणी राम को दिया गया तो टांडा में विधायक संजू देवी का टिकट काटकर पूर्व जिलाध्यक्ष कपिलदेव वर्मा को मैदान में उतारा गया। कपिलदेव की दावेदारी किसी के भी गले नहीं उतर रही थी। बीते साल हुए पंचायत चुनाव में कपिलदेव को न सिर्फ खुद जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में पराजय का सामना करना पड़ा था वरन उनकी पत्नी भी बीडीसी सदस्य पद का चुनाव हार गई थीं। इसके बावजूद टांडा सीट से चुनाव मैदान में उतार दिए जाने को लेकर पार्टी के तमाम क्षेत्रीय पदाधिकारी भी विरोध में थे लेकिन खुलकर सामने नहीं आ रहे थे।
भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना था कि सिटिंग विधायक का टिकट काटने का कोई औचित्य समझ में नहीं आया था। उनके द्वारा न सिर्फ संगठन की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की गई थी वरन योजनाओं का प्रचार प्रसार भी गांव गांव जाकर किया गया था। चुनाव परिणाम आने पर कार्यकर्ताओं की आशंका सच साबित हुई। भाजपा प्रत्याशी कपिलदेव को 30 हजार के बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा। जिलाध्यक्ष पद पर रहते हुए भी कपिलदेव तमाम प्रकार के विवादों से घिरे रहे थे। इसका भी खामियाजा उन्हें चुनाव में उठाना पड़ा। इसी कारण वह खुद अपने बूथ पर जीतने लायक वोट तक नहीं जुटा पाए। उनसे आगे इस बूथ पर बसपा रही।
इस संबंध में जिला पंचायत अध्यक्ष साधू वर्मा के समर्थकों का कहना है कि उनके मूल बूथ पर भाजपा को विजय मिली है। जबकि पूरे विधानसभा क्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा। उनके बूथ पर भाजपा को 214, बसपा को 147 और सपा को मात्र 53 मत ही मिले हैं। दूसरी तरफ निवर्तमान विधायक संजू देवी के समर्थकों का कहना है कि विधायक के मूल बूथ पर अल्पसंख्यक मतों की बहुलता के कारण ही इस बूथ पर भाजपा को जीत नहीं मिली।