अंबेडकरनगर। लोकसभा चुनाव में लगातार दूसरी पराजय ने जिले के भाजपाइयों को तगड़ा सदमा दिया है। राममंदिर प्राण प्रतिष्ठा से लेकर पीएम नरेंद्र मोदी के चेहरे को आगे रखने के साथ ही मुफ्त राशन आदि को लेकर लड़े गए चुनाव का भी फायदा न मिल पाना कार्यकर्ताओं को ज्यादा निराश किए हुए है। उधर चुनाव प्रबंधन की कमान संभालने वाले लोगों के ऊपर भी पार्टी के भीतर आवाज उठनी शुरू हो गई है।
लोकसभा चुनाव में भाजपा को 2019 में भी लगभग एक लाख मत की करारी हार का सामना करना पड़ा था। इस बार 400 पार के दावों ने जिले के कार्यकर्ताओं को भी उत्साहित कर रखा था। चुनाव से ठीक पहले पड़ोसी जनपद अयोध्या में राममंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान अंबेडकरनगर में भी धार्मिक आस्था उफान पर थी। जिले में तीन चौथाई से अधिक हिंदू घरों में भगवा ध्वज लहराने लगा था।
भाजपाइयों की बाछें ये सब देखकर खिली हुई थीं। लोकसभा चुनाव की घोषणा हुई तो मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में उमड़ी धार्मिक आस्था का लाभ चुनाव में मिल जाने की उम्मीद जगी। अभियान का नेतृत्व में देशभर में पीएम नरेंद्र मोदी ने संभाल रखा था। उनके बड़े बड़े कट आउट आदर्श आचार संहिता लगने से पहले जिले में भी जगह जगह दिख रहे थे। कार्यकर्ताओं को पूरी उम्मीद थी कि पीएम नरेंद्र मोदी के चेहरे, मंदिर प्राण प्रतिष्ठा, लोगों को मुफ्त राशन तथा अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ के बलबूते पार्टी इस बार यहां लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर लेगी।
हालांकि कार्यकर्ताओं की यह उम्मीद मतगणना के साथ ही चकनाचूर हो गई। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा की हार का अंतर एक लाख मत से कम था। इस बार एक लाख 36 हजार से अधिक हो गया। कार्यकर्ताओं में इसे लेकर निराशा का माहौल है। कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि आम जनता से जुड़ी समस्याओं व चीजों पर बुनियादी काम हुआ होता तो परिणाम कुछ दूसरा होता।
कई कार्यकर्ता ऐसे हैं जिनका मानना है कि लोकसभा चुनाव प्रबंधन की कमान ठीक से नहीं संभाली गई। मनमाने ढंग से कार्यक्रम बनाए गए। कार्यक्रम को प्रभावी बनाने की बजाए सिर्फ तामझाम पर ही ज्यादा ध्यान दिया गया। नाम न छापने की शर्त पर कुछ जिम्मेदार कार्यकर्ताओं ने कहा कि चुनाव के बंद दिन पहले भाजपा में आए सांसद रितेश पांडेय यहां पार्टी के अंदरूनी स्थिति पूरी तरह समझ पाने में नाकाम रहे। चुनाव प्रबंधन से जुड़े कुछ लोगों ने इसका नाजायज फायदा उठाया। इसी सब का खामियाजा भाजपा को यहां चुनाव में हार के तौर पर देखना पड़ा।
उधर जिलाध्यक्ष त्रयंबक तिवारी कहते हैं कि जनता व कार्यकर्ताओं ने भरपूर साथ दिया। विपक्ष के दुष्प्रचार ने कुछ वोटों पर असर डाला। इसके चलते जीत नहीं हो पाई। प्रत्येक कार्यकर्ता ने पूरे परिश्रम व मनोयोग से पार्टी के लिए काम किया।