गुरुवार को बच्चे ने डीएम से मिलकर न्याय की गुहार लगाई। डीएम विवेक ने वसूली रोकने के साथ ही बैंक से कहा कि न्यूनतम राशि लोक अदालत के जरिये तय की जाए जिसका भुगतान वे अपने विवेकाधीन कोष से करेंगे।
सम्मनपुर थाना क्षेत्र के दुक्खर परमरुदाइन गांव निवासी 10 वर्षीय सलमान के पिता हसनैन का छह वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। उन्होंने बैंक ऑफ बड़ौदा की सिकंदरपुर शाखा से केसीसी के जरिए तीस हजार रुपए ऋण लिया था। यह कर्ज अब 42 हजार रुपए हो चुका है।
मां-बाप व बड़े भाई की मौत के बाद अब घर में सिर्फ सलमान व उसकी की बड़ी बहन नौसीन फातिमा (13) हैं जिनकी देखभाल उसके बुआ-फूफा करते हैं। हाल ही में बैंक की तरफ से एक रजिस्टर्ड पत्र सलमान के दिवंगत पिता के नाम गांव पहुंचा जो जिसके लिफाफे पर हसनैन के नाम के आगे दिवंगत लिखकर ही बैंक ने नोटिस भेजा था।
मतलब यह कि नोटिस भेजते समय बैंक प्रबंधन को यह मालूम था कि ऋण लेने वाले व्यक्ति की मौत हो चुकी है। इसके बाद बैंक ने दो और नोटिस सलमान के नाम भेजे। इनमें आरसी जारी करने की चेतावनी दी गई थी। इसके बाद कुछ ग्रामीणों ने गुरुवार को डीएम विवेक से मिलकर न्याय की गुहार लगाई।
डीएम ही इस सलमान के पदेन संरक्षक हैं। डीएम ने एलडीएम को तत्काल वसूली रोकने व लोक अदालत के जरिये बकाया कर्ज का न्यूनतम राशि पर निपटारा करने के निर्देश दिए। तय धनराशि का भुगतान डीएम के विवेकाधीन कोष से किया जाएगा।
बीमारी से हुई तीन सदस्यों की मौत
सलमान के पिता हसनैन की मौत वर्ष 2009 में टीवी की बीमारी के कारण हो गई थी। वे गांव पर रहकर खेती का काम करते थे। उनकी मौत से लगभग तीन वर्ष पहले पत्नी रिजवाना बानो की मौत भी किसी बीमारी के कारण हो गई थी। सलमान के बड़े भाई अरमान की मौत भी 12 वर्ष की उम्र में टीवी के चलते हो गई। सलमान सिकंदरपुर के वीआरबी साइंस एकेडमी विद्यालय में कक्षा 4 का छात्र है, तो वहीं उसकी बहन नौसीन फातिमा भी इसी विद्यालय में कक्षा 8 की छात्रा है।
केसीसी का लिया था ऋण
परिवार का खर्च चलाने के लिए हसनैन ने गत 28 अप्रैल 2008 को बैंक ऑफ बड़ौदा की सिकंदरपुर शाखा से 30 हजार रुपए का केसीसी ऋण लिया था। ऋण की अदायगी न होने के कारण वह खाता बाद में एनपीए में बदल गया। 6 जून 2015 तक यह बकाया बढ़कर 42 हजार रुपए हो गया। इसी की वसूली के लिए ही बैंक शाखा द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा था।
लगन से पढ़ने की दी सलाह
जिलाधिकारी विवेक ने जनता दर्शन के दौरान आए इस प्रकरण का निस्तारण करने के दौरान सलमान को अपने बगल बुलाया और उसे पुचकारा। उसके नाश्ते व बिस्कुट आदि का प्रबंध करने के साथ ही उससे कहा कि जब भी कोई दिक्कत हो तो वह उनके पास किसी के साथ आ सकता है। डीएम ने उसकी पढ़ाई के बारे में विस्तार से चर्चा की और उससे कहा कि तुम्हें खूब मेहनत से पढ़कर इस कुर्सी तक आना है। किशोर ने सहमति में अपना सिर हिलाया, तो वहां मौजूद लोग भावुक हो उठे।
यह बोले अधिकारी
डीएम विवेक ने कहा कि मामले का निस्तारण यहीं न कर दिया जाता तो आगे बच्चे के बालिग होने पर जब वसूली की प्रक्रिया अमल में आती तब तक बकाए की रकम लाखों तक पहुंच सकती थी। इसकी अदायगी करना उसके लिए कठिन होता। इसको देखते हुए ही इसके तत्काल निस्तारण का निर्णय लिया गया। बैंक ने किन परिस्थितियों में इस तरह का नोटिस जारी किया, इसकी जांच के निर्देश एलडीएम को दिए गए हैं।