जहांगीरगंज थाना क्षेत्र के बिड़हर गांव में 2014 पांच अक्तूबर को गांव के बाहर संदिग्ध हालात में एक युवती का शव पाया गया था। शव इस ढंग से छिपाया गया था कि प्रथम दृष्टया मामला हत्या का प्रतीत हो रहा था।
गांव निवासी रामफेर ने शव की पहचान अपनी 18 वर्षीय पुत्री अंगूरा के रूप में की थी। पिता की तहरीर पर पुलिस ने मामले में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी। जांच के बाद पता चला कि पिता रामफेर ने ही अपनी पुत्री की हत्या कर दी और फिर एक अन्य व्यक्ति रामबूझ के साथ मिलकर शव को ठिकाने लगा दिया।
जांच के दौरान रामफेर शुरू में तो इंकार करता रहा, लेकिन पुलिस ने तथ्यों के साथ पूछताछ की तो उसने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। इसके बाद पुलिस ने दोनो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनका चालान कर दिया। अवर न्यायालय ने दोनों आरोपियों की जमानत अर्जी पहले ही खारिज कर दी थी।
अब सत्र न्यायालय में जमानत के लिए प्रार्थनापत्र दिया गया। अपर जनपद न्यायाधीश वीके जायसवाल ने मामले को गंभीर प्रवृत्ति का मानते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी।