अंबेडकरनगर। कोयले के अभूतपूर्व संकट ने एनटीपीसी फेज-1 की चारों इकाइयों से विद्युत उत्पादन ठप कर दिया है। इन चारों इकाइयों को मिलाकर 440 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता था। दो इकाइयों में मंगलवार को, जबकि शेष दो इकाइयों में बुधवार देर रात कोयले की कमी के चलते उत्पादन ठप कर देना पड़ा। उधर, 660-660 मेगावाट की दो नई इकाइयों से बिजली का उत्पादन चल रहा है। हालांकि इन इकाइयों में भी क्षमता के अनुरूप उत्पादन होने की बजाय 1320 मेेगावाट के सापेक्ष लगभग 850 मेगावाट क्षमता की बिजली का उत्पादन हो रहा है। एनटीपीसी प्रशासन का इस पर पूरा जोर है कि इन दोनों नई इकाइयों से बेहतर उत्पादन हो सके। ऐसा इसलिए क्योंकि इस नई इकाई से उत्पादित बिजली सस्ती पड़ती है। इसके चलते इसकी मांग ज्यादा रहती है।
देश में कोयले के अभूतपूर्व संकट की मार जिले के टांडा में स्थित एनटीपीसी की उत्पादन यूनिटों पर पड़ा है। पिछले करीब एक सप्ताह से यहां भी कोयले का संकट ज्यादा बढ़ गया है। हालांकि कोयले की कमी इसके दो-तीन सप्ताह पहले से ही बनी हुई थी, लेकिन तब से किसी तरह काम चलता आ रहा था। एनटीपीसी के स्थानीय प्रबंधन ने बेहतर कार्य क्षमता के जरिए उत्पादन को ज्यादा प्रभावित होने से बचा रखा था।
यह बात अलग है कि कोयले की कमी के चलते लगातार उत्पादन पर असर पड़ रहा था। कोयला संकट को देखते हुए पावर कॉर्पोरेशन की तरफ से समुचित मांग भी नहीं भेजी जा रही थी। एनटीपीसी के स्थानीय अधिकारियों व कर्मचारियों ने अपने स्तर पर माहौल को संभालने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन कोयला संकट ने उत्पादन पर ज्यादा असर डालना शुरू कर दिया। नतीजा यह है कि एक-एक कर अब फेज-1 में स्थापित सभी चार इकाइयों से बिजली का उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। इस फेज में 110-110 मेगावाट की चार इकाइयां स्थापित हैं। इनमें से दो इकाइयों में कोयले की कमी के चलते मंगलवार दिन में आपूर्ति ठप कर दी गई थी।
उम्मीद थी कि कोयले की आपूर्ति में बढ़ोत्तरी होगी तो फेज-1 की दो अन्य इकाइयों का संचालन जारी रखा जा सकेगा। यह बात अलग है कि मांग के अनुरूप कोयला न मिल पाने के चलते फेज-1 की शेष दोनों इकाइयों से भी बिजली का उत्पादन बुधवार देर रात ठप कर दिया गया। ऐसे में 440 मेगावाट की चारों इकाइयों में बुधवार देर रात तक बिजली उत्पादित करने का कार्य पूरी तरह रुक गया। एनटीपीसी की ओर से संचालित इस पावर प्लांट में अधिग्रहण के पहले तथा उससे पहले के वर्षों में लंबे समय बाद ऐसी अभूतपूर्व स्थिति आई है। एनटीपीसी फेज-1 की चारों इकाइयों से विद्युत उत्पादन ठप हो जाने को लेकर कर्मचारियों में मायूसी देखने को मिली है। कई कर्मियों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि समय रहते विशेष प्रयास होना चाहिए था।
फेज-2 की इकाइयों में बढ़ा उत्पादन
एनटीपीसी फेज-2 में स्थापित 1320 मेगावाट की इकाइयों में उत्पादन बीते दिनों के मुकाबले थोड़ा बढ़ा है। दरअसल कोयले की कमी के चलते 660-660 की दो इकाइयों से भी उत्पादन पिछले कई दिनों से प्रभावित हुआ था। 1320 मेेगावाट क्षमता के सापेक्ष उत्पादन 750 मेगावाट तक रह गया था। यह वह दौर था जब फेज-2 और फेज-1 की सभी इकाइयां संचालित थीं। अब जबकि फेज-1 की सभी चार यूनिट में उत्पादन ठप पड़ गया है तो कोयले की खपत कम होने के चलते फेज-2 में स्थापित 1320 मेगावाट की इकाइयों में बिजली का उत्पादन लगभग 100 मेगावाट तक बढ़ा है। 850 से लेकर 875 मेगावाट तक बिजली का उत्पादन गुरुवार को दर्ज हुआ। एनटीपीसी प्रशासन की कोशिश इसे एक हजार मेगावाट तक जल्द से जल्द पहुंचाने की है। इसके लिए सभी जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं।
संयंत्र सुचारु रूप से चलाने को प्रतिबद्ध
एनटीपीसी टांडा प्रबंधन ने गुरुवार को सार्वजनिक सूचना जारी कर कहा कि कोयला संकट का एनटीपीसी टांडा परियोजना पर कोई स्थायी प्रभाव नहीं पड़ा है। 1760 मेगावाट के पूरे संयंत्र को सुचारु रूप से चलाने और बिजली का पर्याप्त उत्पादन करने के लिए हम पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। कुछ वर्षों के अंतराल में ही ऐसे संयंत्र की बुनियाद रखी गई है, जो प्रदेश में विकास की रोशनी लेकर आ रही है। कोविड की पहली व दूसरी लहर में भी एनटीपीसी ने यूपी में लगातार प्रकाश बनाए रखा और चिकित्सीय संसाधनों का निरंतर संचालन सुनिश्चित किया। जनसंपर्क अधिकारी शिखा प्रसून ने एनटीपीसी प्रबंधन की तरफ से भरोसा दिलाया कि एनटीपीसी टांडा इसी दृष्टि और लक्ष्य से आगे चलती रहेगी। कोयले के संदर्भ में एनटीपीसी टांडा की स्थिति बेहतर है। हमारे पास कोयला भंडार भी पर्याप्त है। हम भरोसा दिलाते हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर कोयले की जो कुछ कमी देखने को मिल रही है, उसे दूर करने का प्रबंधन की ओर से हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। प्रबंधन के विशेष प्रयासों से टांडा को अतिरिक्त कोयले की आपूर्ति हुई है। इससे यूपी के निवासियों को किसी प्रकार की मुश्किलों का सामना न करना पड़े। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय, केंद्रीय कोयला मंत्रालय और एनटीपीसी के केंद्रीय कार्यालय के लिए टांडा परियोजना उच्च प्राथमिकता में है और आगे रहेगी भी।