अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के भोजन में भी भ्रष्टाचार का घुन सामने आया है। स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन व स्वास्थ्य राज्यमंत्री शंखलाल मांझी के गृह जनपद में मरीजों को जो भोजन परोसा जा रहा है, उसे जानवर भी खाने से मना कर दें। पानी जैसी दाल व रसेदार सब्जी, अधपका चावल और जली हुई रोटी ही मरीजों को नसीब होती है। इससे ज्यादातर मरीज जिला अस्पताल में बने ऐसे भोजन को लेने से ही इन्कार कर देते हैं।
जिला चिकित्सालय में भर्ती मरीजों को दूध के साथ-साथ दोपहर व रात के समय खाना उपलब्ध कराए जाने की योजना बीते दिनों शुरू हुई थी। मरीजों को समय पर भोजन दिए जाने के लिए बाकायदा टेंडर निकाला गया। जिला चिकित्सालय में इसकी जिम्मेदारी दो ठेकेदारों को संयुक्त रूप से दी गई। यह बात अलग है कि कभी मरीजों को जली रोटी दी जाती है तो कभी अधपका चावल। दाल के नाम पर सिर्फ पानी परोसा जा रहा है। जबकि प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के कैबिनेट और राज्यमंत्री दोनों इसी जिले के हैं। अमर उजाला टीम ने शनिवार को जिला चिकित्सालय में भोजन व्यवस्था का जायजा लिया तो मरीजों से वार्ता में उनका दर्द फूट पड़ा। वार्ड नंबर एक में भर्ती सुईडीह निवासिनी ज्ञानमती ने कहा कि जो भोजन यहां दिया जाता है, उसे तो किसी जानवर को भी नहीं परोसा जा सकता। आक्रोशित लहजे में बोलीं कि आखिर यह सब कोई देखने वाला नहीं है क्या? इसी वार्ड में भर्ती निमदीपुर गांव निवासिनी कुशलावती ने कहा कि खाना आता तो है, लेकिन उसमें कोई स्वाद नहीं रहता। चावल में दाल को मिला दिया जाए, तो भी चावल सफेद ही बना रह जाता है। कई बार चावल अधपका रहता है। बताया कि शुक्रवार सायं सब्जी मिलनी थी, लेकिन पानी जैसी दाल के साथ चावल व जली रोटी देकर काम चला लिया गया। वार्ड नंबर तीन में भर्ती मीरानपुर निवासी साहबलाल ने बताया कि खाने के नाम पर सिर्फ फर्ज अदायगी हो रही। चिकित्सकों व कर्मचारियों से उन्होंने शिकायत भी की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बताया कि शुक्रवार सुबह तो उन्होंने किसी तरह खाना खा लिया था, लेकिन सायं को जो खाना मिला, वह खाने लायक कतई नहीं था।