अंबेडकरनगर। जिला प्रशासन ने आरटीआई कार्यकर्ता शाहिद मुनीर सिद्दीकी समेत कुल 73 लोगों को जिला बदर कर दिया है। शाहिद लगातार अलग-अलग विभागों से जनसूचना मांगते आ रहे हैं। एडीएम ने अलग-अलग आपराधिक मुकदमे का हवाला देते हुए ऐसे सभी लोगों को एक से छह माह तक के लिए जिला बदर किया है। उन्होंने पुलिस प्रशासन को पत्र भेजकर इसका सख्ती से पालन कराने को कहा है।
जिला बदर करने की बड़ी घोषणा मंगलवार को जिला प्रशासन ने की। बताया कि नवंबर माह में कुल 73 लोगों को जिला बदर कर दिया गया। यह सारी कार्रवाई अलग-अलग अपराधों को लेकर हुई। सूचना जारी करते समय प्रशासन ने सिर्फ दो नामों का उल्लेख किया। एक नाम प्रसिद्ध आरटीआई कार्यकर्ता शाहिद मुनीर सिद्दीकी का है। शाहिद द्वारा लगातार अलग-अलग विभागों व प्रशासन को लेकर सूचनाएं मांगी जाती हैं। वे कई बार पिछले कुछ वर्षों में प्रशासन पर उत्पीड़न का आरोप लगा चुके हैं। बीते दिनों ही उन्होंने फिर से कई जनसूचनाएं मांगी थीं। अब उन पर दर्ज अलग-अलग मुकदमों का हवाला देकर छह माह के लिए जिला बदर कर दिया गया है।
इसके साथ ही प्रशासन ने एक अन्य नाम का उल्लेख किया है। वह है जहांगीरगंज के सुतहरपारा गांव निवासी घनश्याम का। गांव निवासी भाजपा नेता अभिषेक कन्नौजिया से इनका विवाद चलता है। इन्हीं दोनों के बीच दर्ज मुकदमों के बाद अब घनश्याम को भी जिला बदर की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। उधर एडीएम डॉ. सदानंद गुप्त ने बताया कि आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को जिला बदर किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यह प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। सारी कार्रवाई नियमानुसार प्रक्रिया अपनाकर की गई है।
जिले में न होने के बाद भी खतरा
शाहिद मुनीर सिद्दीकी ने कहा कि वह वर्ष 2016 से जिले में रहते ही नहीं। पूर्व में जिले के दो अधिकारियों ने अपनी एक जांच आख्या में लिखा है कि शाहिद 2016 से जिले में नहीं रहते। ऐसे में अब प्रशासन का कौन सा विभाग सही काम कर रहा है यह जवाब प्रशासन कोर्ट में देगा। मैं जनसूचना के जरिए प्रशासन की मनमानी रोकने के लिए आगे और मजबूती से काम करूंगा। जिन मामलों में जनसूचना मांगी हैं उसमें प्रशासन को कार्रवाई करनी ही होगी।