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झूम उठा समाज का प्रत्येक वर्ग, कहा इसी फैसले की थी जरूरत

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अंबेडकरनगर। जम्मू और कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने का निर्णय होते ही समूचे जिले में खुशियां बिखर गईं। आमनागरिकों ने इसका बढ़ चढ़कर स्वागत किया। कई जगहों पर दलीय प्रतिबद्धताएं भी इस निर्णय पर भारी पड़ीं। भाजपा के अलावा विभिन्न दलों के कार्यकर्ताओं ने भी इस निर्णय का बढ़ चढ़कर स्वागत किया। हालांकि भाजपा छोड़ अन्य दलों के जिम्मेदार पदाधिकारी खुलकर कुछ भी कहने से बचते रहे। सोमवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कश्मीर पर जैसे ही निर्णयों की घोषणा करना शुरू किया, उससे पहले ही लोग टीवी से चिपक गए थे। उन्हें किसी बड़े फैसलेे का इंतजार था। वे निराश भी नहीं हुए।
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कश्मीर से जैसे ही 370 हटाने तथा राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने की खबर टीवी पर चली, वैसे ही सामने बैठे लोग जगह जगह खुशी से झूम उठे। एक दूसरे को बधाई दी जाने लगी। फोन कर खुशियां बाटे जाने का दौर शुरू हो गया। इसके साथ ही जगह लोग मोबाइल पर संसद में चल रहे भाषण का लाइव देखने में जुटे रहे। युवाओं ने कई जगह तिरंगे का वितरण भी किया। फैसला आने के बाद अमर उजाला ने समाज के अलग अलग वर्ग के लोगों से बात की, तो उनकी प्रतिक्रिया कुछ इस तरह रही-
जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के केंद्र सरकार के ऐतिहासिक व साहसिक फैसलेे से समूचा देश झूम उठा है। जिसमें दृढ़ इच्छाशक्ति होगी, वही इस प्रकार के साहसिक फैसले ले सकता है। धारा 370 हटने से कश्मीर से कन्या कुमार तक अब एक जैसा हो गया है। इसकी जितनी भी सराहना की जाए कम ही है। पूरे देश को इसी पल का इंतजार था।
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कश्मीर से धारा 370 हटाया जाना लोकतंत्र की हत्या है। ऐसा कर कश्मीरियों के साथ धोखा किया गया है। कांग्रेस पार्टी इसकी कड़ी निंदा करती है। जब कश्मीरियों के साथ धारा 370 न हटाए जाने का समझौता हुआ था, तो अब इसे हटाने का कोई औचित्य नहीं है। लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए सरकार को अपना फैसला बदलना होगा।
केंद्र सरकार को सभी दलों से विचार विमर्श ऐसे फैसलों पर करना चाहिए। स्वस्थ लोकतंत्र के लिए यह अच्छा होता है। कोई भी ऐसा बड़ा निर्णय लेने में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की राय भी जरूर शामिल की जानी चाहिए।
सरकार के निर्णय से हम सब सहमत हैं। इसमें फिलहाल विरोध जैसी कोई बात नहीं है। सरकार को साफ नीयत के साथ ऐसे फैसलों को लागू करना चाहिए। जनभावनाओं का सम्मान हो, यह बसपा भी चाहती है।
देश की एकता व अखण्डता के लिए देश में एक संविधान होना जरूरी था। जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। ऐसे में वहां से धारा 370 हटना जरूरी था। केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक फैसला कर देशवासियों की वर्षों से चली आ रही कामना को पूरा किया है। यह निर्णय देश के आमनागरिकों की जनभावना के अनुरूप हुआ है।
धारा 370 हटाने के साथ ही जम्मू कश्मीर को दो भागों में बांटकर केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने से न सिर्फ कश्मीर का विकास होगा, बल्कि इससे समूचे में एक जैसा संविधान होगा। केंद्र का फैसला पूरी तरह साहसिक है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता है। इस फैसले के आते ही देश में जिस तरह से एकतरफा समर्थन हुआ है, उससे जनता की भावना का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।
नागपंचमी पर्व की खुशियां उस पल कई गुनी बढ़ गई, जब केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने की घोषणा की। यह पल जिंदगीभर याद रहेगा। पर्व के दिन सरकार के इस तोहफे सेसमूचा देश झूम उठा है। सभी को लंबे समय से इस पल का इंतजार था। यह एक अभूतपूर्व फैसला है, जिसका सब लोग बढ़ चढ़कर स्वागत कर रहे हैं।
धारा 370 जारी रहने से देश में एक संविधान का लागू होने में बड़ी बाधा थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने इस धारा को हटाकर अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया है। ऐसे ही फैसले से देश का विकास तेजी से आगे बढ़ सकता है। उम्मीद है कि देशहित में आगे भी इस प्रकार के कड़े फैसले लिए जाते रहेंगे।
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