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पुरानी पुस्तकों से पढ़ रहे 2.40 लाख बच्चे

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अंबेडकरनगर। परिषदीय स्कूलों में पठन-पाठन शुरू हुए एक सप्ताह बीत गया, लेकिन 2.40 लाख बच्चों को पुरानी किताबें ही पढ़नी पड़ रही हैं। जिले में अब तक नई पुस्तकों की खेप नहीं पहुंच सकी। विभागीय सूत्रों के मुताबिक करीब एक सप्ताह बाद किताबों की खेप आने लगेगी। ऐसे में इसका वितरण शुरू होने में जुलाई बीत जाएगा।
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जिले के 1582 परिषदीय स्कूलों के बच्चों को अब तक नई पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। शासन द्वारा बीते माह ही नई पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए राजीव प्रकाशन, नेशनल प्रकाशन, भगवंत प्रकाशन लखनऊ सहित कई अन्य को जिम्मेदारी दी गई है। इसके बावजूद अब तक पुस्तकें नहीं पहुंचीं। यह हाल तब है जब शासन परिषदीय स्कूलों के बच्चों को कॉन्वेंट स्कूलों जैसी सुविधा दिलाने का दावा करता है।
तमाम निर्देशों के बावजूद परिषदीय स्कूलों की दशा में खास सुधार नहीं दिख रहा है।
ग्रीष्मावकाश के बाद जुलाई से स्कूल खुले तो उम्मीद थी कि बच्चों को नई पुस्तकें मिल जाएंगी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। परिषदीय स्कूलों में करीब दो लाख 40 हजार छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। पुस्तकों के अलावा छात्र-छात्राओं को ड्रेस, जूता-मोजा व बैग आदि का भी इंतजार बना हुआ है।
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अभिभावक बोले, स्कूलों में की जाए बेहतर व्यवस्था
अकबरपुर नगर निवासी प्रवीण कुमार, राधेश्याम व महेंद्र आदि अभिभावकों का कहना है कि परिषदीय स्कूलों में बेहतर व्यवस्था किए जाने की जरूरत है। कहा कि सरकार को बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। तत्परता के साथ विद्यालयों में जरूरी सुविधाएं प्रदान करने के साथ ही छात्र-छात्राओं को पुस्तकें, ड्रेस, जूता-मोजा व बैग आदि समय से उपलब्ध कराना चाहिए।
की जाएगी कार्रवाई
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भोलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जिन प्रकाशकों को पुस्तकें उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उन्हें नोटिस भेजा गया है। यदि एक सप्ताह के अंदर पुस्तकों की आपूर्ति शुरू न की गई तो कार्रवाई की जाएगी। पुस्तकें जल्द पहुंचें, इसके लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं।
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