अंबेडकरनगर। महिला सशक्तीकरण का सपना तभी साकार होगा जब महिलाएं स्वयं अपने अस्तित्व को पहचानते हुए दृढ़ इच्छाशक्ति पैदा करें। ये बातें गुरुवार को अकबरपुर नगर के मीरानपुर स्थित संयुक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में अमर उजाला की अपराजिता मुहिम के तहत 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम में कही गईं। यहां एएनएम की वर्कशॉप में महिला चिकित्सक डॉ. रिंकी रश्मि ने कहा कि महिला उत्पीड़न का शिकार होने वाली महिलाओं को चाहिए कि वे पूरी मजबूती के साथ विरोध करें। जब तक ऐसा नहीं करेंगी तब तक महिलाओं का उत्पीड़न होता रहेगा।
डॉ. रश्मि ने कहा कि महिलाओं को अपना अधिकार पाने के लिए उन्हें शत-प्रतिशत शिक्षित होना होगा। साथ ही अपने अंदर की हिचक को समाप्त करना होगा। दृढ़ इच्छाशक्ति पैदा करने के साथ ही अपनी बातों को पूरी मजबूती के साथ सामने रखना होगा।
जिस दिन ऐसा करने लगेंगी, उन्हें उनका अधिकार व सम्मान मिलने लगेगा। कहा कि महिला सशक्तीकरण को लेकर बातें तो बढ़ चढ़कर की जाती हैं, लेकिन उसे जमीनी हकीकत देने को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जाती। इसे लेकर जिम्मेदारों को गंभीरता दिखानी होगी।
स्वास्थ्य कर्मचारी नीलम पाल, सीमा शुक्ला व राजकुमारी व सुभावती मौर्या ने कहा कि हम सभी को अपने अधिकार को लेकर जागरूक होना होगा। साथ ही हक की लड़ाई पूरी मजबूती से लड़नी होगी।
स्वास्थ्य कर्मी आरती यादव, नेहा श्रीवास्तव व सुमन कुमारी ने कहा कि जब तक महिलाएं खुद अपने अधिकार को लेकर जागरूक नहीं होंगी, तब तक उन्हें उनका समुचित अधिकार नहीं मिलने वाला है। इसके लिए महिलाओं को शत-प्रतिशत शिक्षित होना होगा। साथ ही अपने अधिकार की आवाज पूरी मजबूती से उठानी होगी।
स्वास्थ्य कर्मी इंदू वर्मा, शकुंतला देवी व किसमत्ती ने कहा कि महिला सशक्तीकरण की बातें तो सभी करते हैं, लेकिन उसे जमीनी हकीकत देने को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जाती। 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण तो दिया गया है, लेकिन उसका अक्षरश: पालन नहीं होता। महिलाओं के उत्थान व उनके सम्मान के लिए इसे पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य कर्मी चंद्रावती, शीला देवी व शारदा ने कहा कि बढ़ती महिला हिंसा की जिम्मेदार काफी हद तक महिलाएं स्वयं हैं। कई महिलाएं ऐसी हैं जो उत्पीड़न पर भी चुप्पी साधे रहती हैं। वे उसका विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पातीं। यह पूरी तरह गलत है। ऐसा नहीं होना चाहिए। उत्पीड़न का पूरी मजबूती के साथ विरोध करना होगा। ऐसा होने पर महिला उत्पीड़न की वारदातों में कमी आ सकेगी।
स्वास्थ्य कर्मी साधना, मालती देवी व संजू त्रिपाठी ने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए उन्हें अपने अंदर दृढ़ इच्छाशक्ति पैदा करनी होगी। अपनी बातों को बेहिचक होकर कहना होगा। साथ ही शत-प्रतिशत शिक्षित होना होगा। जब तक ऐसा नहीं करेंगी, तब तक उनका उत्थान नहीं हो सकेगा।