अंबेडकरनगर। फायरिंग व उपद्रव करने के आरोपियों पर कठोरतम कार्रवाई करने तथा परिसर में सुरक्षा का माहौल तय करने की मांग को लेकर राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर के कर्मचारियों ने लगातार दूसरे दिन कार्य बहिष्कार कर प्रदर्शन किया। इससे ओपीडी पूरे दिन ठप रही। वार्डों में भी सन्नाटे का माहौल रहा। लगभग 1 हजार मरीजों व तीमारदारों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। हालांकि दिन में डीएम व एसपी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। घंटों चले मान मनौव्वल के साथ ही कार्रवाई की चेतावनी के बीच अपराह्न तीन बजे करीब कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त कर दी। इसमें शामिल मेडिकल छात्र भी हॉस्टल लौट गए। हड़ताल समाप्त होने से अब शुक्रवार को ओपीडी सेवा सुचारु ढंग से चलने की उम्मीद है। उधर कॉलेज के जिन 26 चिकित्सकों ने घटना के विरोध में अपना त्यागपत्र भेज दिया था। उन्होंने गुरुवार को प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा को भी पत्र भेजकर कहा है कि उनके त्यागपत्र पर अब विचार न किया जाय। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य ने इसकी पुष्टि की है। इस बीच प्राचार्य ने घटना का केंद्र बिंदु बने उस एंबुलेंस चालक को नोटिस जारी किया है जो मंगलवार रात मौके पर उपलब्ध नहीं हो पाया।
गौरतलब है कि मंगलवार रात राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में टांडा की विधायक संजू देवी के देवर व प्रतिनिधि श्यामबाबू गुप्ता व उनके समर्थकों ने एंबुलेंस मिलने में देरी से नाराज होकर प्राचार्य व चीफ प्रॉक्टर की पिटाई कर दी थी। दोनों को बंधक भी बना लिया गया था। विधायक प्रतिनिधि ने लाइसेंसी पिस्टल से कई चक्र फायरिंग भी की थी, जिससे एक कर्मी अरविंद घायल हुआ था। घटना से नाराज मेडिकल छात्रों ने विधायक प्रतिनिधि के वाहन समेत उनके साथ आए दो अन्य वाहनों को आग लगा दी थी। घंटों चली अराजकता पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के पहुंचने पर समाप्त हुई थी। इसी मामले को लेकर मेडिकल कॉलेज के सभी चिकित्सक व कर्मचारी बुधवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे। 26 चिकित्सकों ने इस बीच सामूहिक इस्तीफा भी दे दिया था। घटना के बाद ही पुलिस प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए विधायक प्रतिनिधि समेत नौ लोगों को हिरासत में ले लिया था, जिन्हें बुधवार को भाजपा कार्यकर्ताओं के घंटों हंगामे के बाद भी रिहा नहीं किया गया। मामले में दोनों तरफ से कुल चार केस दर्ज हुए थे। देर रात विधायक प्रतिनिधि समेत चार लोगों को मुचलके पर जमानत दे दी गई, जबकि मेडिकल कॉलेज के दो वरिष्ठ चिकित्सकों को भी निजी मुचलके पर जमानत दी गई।
इसी घटना को लेकर गुरुवार को भी हड़ताल जारी रही। मेडिकल छात्र परिसर में धरने पर बैठ गए। पैरामेडिकल स्टाफ के अलावा अन्य कर्मचारियों ने भी कार्य बहिष्कार जारी रखा। उनका कहना था कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई तथा परिसर में सुरक्षा के लिखित आश्वासन के बगैर वे सब हड़ताल समाप्त नहीं करेंगे। इसकी जानकारी मिलते ही दोपहर होने से पहले डीएम सुरेश कुमार व एसपी विपिन कुमार मिश्र मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। वहां प्राचार्य डॉ. पीके सिंह के कक्ष में उनके अलावा विभिन्न संकाय सदस्यों के साथ गहन मंत्रणा की। दोनों अधिकारियों ने सुरक्षा का भरोसा दिलाया। डीएम व एसपी ने कहा कि परिसर में कतई अराजकता का माहौल आगे नहीं होने दिया जाएगा। किसी ने भी इलाज में अनावश्यक दबाव या दखल देने की कोशिश की, तो उस पर कड़ी कार्रवाई होगी। इसके बाद अपराह्न तीन बजे करीब हड़ताल समाप्त हो गई।
समझाने के साथ सख्ती करने पर बनी बात
गुरुवार को डीएम व एसपी की वार्ता के बाद प्राचार्य समेत सभी वरिष्ठ चिकित्सक इस पर सहमत हो गए। हालांकि इसके बावजूद मेडिकल छात्र व विभिन्न संवर्गों के कर्मचारी हड़ताल समाप्त करने पर राजी नहीं हो रहे थे। उन्हें लिखित आश्वासन चाहिए था। डीएम व एसपी ने इस पर कर्मचारियों को बुलाकर उनके प्रतिनिधियों से भी वार्ता की। दोनों अधिकारियों ने कहा कि वे सब उन कर्मचारियों से अलग नहीं हैं। सभी एक राजकीय परिवार का हिस्सा हैं। कर्मचारियों के सम्मान व सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। दो तीन प्रतिनिधिमंडलों से वार्ता के बाद भी जब कर्मचारी व मेडिकल छात्र व प्रदर्शन पर डटे रहे, तो दोनों अधिकारियों को तेवर सख्त करने पड़े। आउट सोर्सिंग से जुड़ी कंपनी को हटवा देने की नौबत आते देख कर्मचारियों के तेवर ढीले पड़ गए। पर्दे के पीछे जो लोग थे, उन्हें भी अधिकारियों के इस तेवर के बाद अपनी रणनीति बदलनी पड़ी। नतीजा यह हुआ कि बनता मामला बिगड़ते देख अंतत: कर्मचारियों ने तय किया कि वे अपनी हड़ताल वापस ले रहे हैं। मेडिकल छात्र भी इसके बाद धरनास्थल से उठकर हास्टल की तरफ चले गए।