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बाहरी मरीजों की मेडिकल कालेज में नहीं होती एमआरआई व सीटी स्कैन जांच

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अंबेडकरनगर। राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में मरीजों के हितों की कोई फिक्र नजर नहीं आती। कई मामलों में तो मरीजों के हित के साथ खिलवाड़ तक हो रहा। हालत यह है कि एमआरआई व सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण जांच की सुविधा बाहरी मरीजों के लिए ठप पड़ी है। रेडियोलॉजिस्ट न होने से रिपोर्ट तैयार नहीं हो पा रही। मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने वाले मरीजों को विशेष जरूरत पड़ने पर इन मशीनों का प्रयोग चिकित्सक अपनी संतुष्टि व बेहतर इलाज के लिए कर लेते हैं। हालांकि जिले के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा आस पास के जिलों से भी आने वाले मरीजों को यहां से निराश होकर लौटना पड़ता है। लंबी दूरी में फैले मेडिकल कॉलेज में कई स्थानों पर अभी लिफ्ट शुरू न किए जाने का दंश भी मरीजों को झेलना पड़ रहा। उन्हें सीढ़ी तय कर वार्डों तक आने जाने की विवशता का सामना करना पड़ रहा है। सुविधाओं को लेकर बरती जा रही इस लापरवाही पर मरीजों के साथ ही उनके तीमारदारों ने भी कड़ी नाराजगी का इजहार किया है।
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बसपा सरकार में स्थापित राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज में सुविधाएं बढ़ने का नाम नहीं ले रही हैं। राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज में जिन महत्वपूर्ण जांचों, ऑपरेशन व इलाज की सुविधा मिलनी चाहिए। मगर, उसके लाभ से अभी जनपदवासी वंचित हैं। लगभग छह माह पूर्व मेडिकल कॉलेज को एमआरआई जांच की सुविधा मिली थी। तो मरीजों में उम्मीद जगी कि अब इस महत्वपूर्ण जांच के लिए फैजाबाद, लखनऊ या बनारस जैसे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। जिले में ही यह जांच आसानी से हो जाया करेगी। हालांकि मरीजों की यह उम्मीद अभी पूरी नहीं हो पा रही है। दरअसल इसके संचालन आदि के लिए रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हो पायी है। ऐसे में एमआरआई जांच के लिए यहां आने वाले मरीजों को निराशा ही हाथ लगती है। इसमें अंबेडकरनगर जिले के अलावा सुल्तानपुर, जौनपुर व आजमगढ़ समेत बस्ती एवं संतकबीरनगर जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों के मरीज भी शामिल हैं। महत्वपूर्ण जांच की सुविधा मेडिकल कॉलेज में मिल जाने की उम्मीद लेकर मरीज यहां पहुंचता है, लेकिन उसे यहां पहुंचने के बाद उसे ठगे जाने का एहसास होता है।
मालीपुर से पहुंचे मरीज विनय कुमार ने बताया कि उन्हें यहां जांच के लिए एमआरआई मशीन लगी होने की जानकारी मिली थी। एक दिन पहले वे यहां पहुंचे तो पता चला कि मशीन ही नहीं चल रही है। इससे उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा। बुुधवार को मिलीं महिला मरीज रुख्साना ने कहा कि मशीनों की स्थापना तो करा दी गई, लेकिन उसके संचालन के लिए कर्मचारियों की तैनाती की सुध भी स्वास्थ्य विभाग को करना चाहिए। लाखों खर्च कर आयीं मशीनों का लाभ मरीजों को तभी मिल पाएगा जब उसका बेहतर संचालन होगा। यही हाल सीटी स्कैन जांच का भी है। इस जांच के लिए भी यहां आम मरीजों को सुविधा नहीं मिल पा रही। मेडिकल कालेज में भर्ती मरीजों के लिए बहुत जरूरी होने पर ही यदा कदा चिकित्सक इन दोनों मशीनों का संचालन कर आवश्यक जानकारी हासिल कर लेते हैं। इसके अलावा बाहरी मरीजों के लिए यह दोनों मशीनें सिर्फ छलावा बनकर रह गई हैं। उधर कई जगहों पर लगी लिफ्ट का संचालन भी अभी तक न हो पाने से मरीजों व तीमारदारों को सीढ़ियों के सहारे ही लंबा रास्ता काटने को विवश होना पड़ रहा है। इससे भी उनकी मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं।
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हो रहे सभी जरूरी प्रयास
रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती यहां नहीं है। इसके चलते ही बाहरी मरीजों को अभी एमआरआई व सीटी स्कैन जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इसके लिए जरूरी पत्राचार किए गए हैं। कई जगहों पर लिफ्ट भी शुुरू करा दी गई है। -डॉ. सुजीत राय, चीफ प्राक्टर
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