अंबेडकरनगर। क्रय केंद्र प्रभारियों की मनमानी से जिले के धान क्रय केंद्रों पर खरीद का कार्य पूरी तरह ठप पड़ गया है। केंद्र प्रभारी सिर्फ यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्ति पा जाते हैं कि उनके पास स्टाक रखने की जगह नहीं है। ऐसे में प्रशासन की उदासीनता का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। किसान अपनी उपज की बिक्री के लिए एक क्रय केंद्र से दूसरे क्रय केंद्र का चक्कर काट रहा है, लेकिन उसे निराशा ही हाथ लग रही है। उदासीनता का ही परिणाम है कि दो माह से अधिक का समय बीत गया, लेकिन अब तक सिर्फ 46 प्रतिशत ही धान की खरीद हो सकी है। जबकि आगे सिर्फ डेढ़ माह तक ही खरीद होनी है।
प्रदेश सरकार ने इस बार किसानों के धान की खरीद के तमाम दावे किए, लेकिन वे सब जमीनी हकीकत में बदल नहीं पाए। न सिर्फ प्रमुख सचिव स्तर पर इसके लिए कई बार आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किया गया, बल्कि मुख्यमंत्री महंत आदित्यनाथ ने भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए थे। जिले में खरीद एजेंसियों की मनमानी शासन की मंशा पर भारी पड़ती दिख रही। गत 1 नवंबर से जिले के विभिन्न एजेंसियों के कुल 85 क्रय केंद्रों पर खरीद का कार्य शुरू हुआ। सभी एजेंसियों को धान क्रय के लिए अलग-अलग लक्ष्य भी दिए गए। इस बार जिले को कुल 1 लाख 37 हजार 600 मीट्रिक टन धान का खरीद करने का लक्ष्य मिला था। लगभग दो माह का समय बीत गया, लेकिन अब तक महज 7 हजार 771 किसानों का महज 63 हजार 329 मीट्रिक टन धान का खरीद किया जा सका है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक यह कुल लक्ष्य का महज 46 प्रतिशत है।
इस बीच भंडारण का अभाव बताकर ज्यादातर केंद्रों पर खरीद का काम ठप पड़ गया है। नतीजा यह कि किसानों के धान की बिक्री नहीं हो पा रही है। अकबरपुर तहसील क्षेत्र के गौहन्ना निवासी किसान सुनील कुमार ने बताया कि काफी भाग दौड़ के बावजूद उनके धान की बिक्री अब तक नहीं हो पाई है। बताया कि पहले तकनीकी दिक्कत के चलते उनका ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा था। वह समस्या किसी तरीके से दूर हुई और रजिस्ट्रेशन कराया। अब वह धान बिक्री के लिए चक्कर काट रहे हैं। गांव के पास स्थित प्राइवेट प्लेयर्स के क्रय केंद्र पर एक सप्ताह से भंडारण की जगह न होने की बात कहकर खरीद नहीं की जा रही है। साधन सहकारी समिति महरुआ गोला में भी 1400 क्विंटल धान की खरीद के बाद से भंडारण की जगह न होने के चलते खरीद का कार्य ठप पड़ा है। किसान देवव्रत सिंह, शिवमूरत व जगदंबा सिंह आदि का कहना है कि वह लोग धान की बिक्री के लिए काफी दिनों से चक्कर काट रहे हैं। जलालपुर के क्रय केन्द्र रेवई, बडेे़पुर, खजुरी करौंदी का भी यही हाल है। भंडारण का अभाव बताकर प्रभारी क्रय केन्द्र से गायब रहते हैं, और किसान धान की बिक्री के लिए केन्द्रों का चक्कर काट रहे हैं। कासिमपुर कर्बला के संतोष पाण्डेय व जलालपुर के संदीप कुमार का आरोप है कि आम किसानों को कोई न कोई बहाना बताकर वापस कर दिया जाता है।
न दिखा मटके में पानी न मिला पेठा
धान खरीद का कार्य शुरू होने से पहले प्रदेश सरकार ने किसान हितों की बात करते हुए क्रय केंद्रों पर न सिर्फ टेंट लगवाने का निर्देश दिया था। बल्कि धान बिक्री के लिए पहुंचने वाले किसानों के लिए मटके में स्वच्छ जल रखने की सलाह दी थी। किसान चाव से पानी पी सकें। परन्तु दो माह से अधिक का समय बीत गया, एक भी क्रय केन्द्र पर यह व्यवस्थाएं नहीं दिखीं। भिखारीपुर के किसान राजेन्द्र यादव ने बताया कि वह धान बिक्री के लिए पीसीएफ के क्रय केंद्र पर गए थे। पानी व पेठा मिलने की बात तो दूर भीषण कोहरे के बावजूद टेंट तक की व्यवस्था वहां नहीं दिखी, जिससे किसान सुरक्षित बैठ सकें। टांडा के किसान देव कुमार, टांडा के बलवीर ने भी बताया कि उनके क्षेत्र में स्थित क्रय केंद्रों पर भी ऐसी व्यवस्था नही दिखती। राजेसुल्तानपुर, जहांगीरगंज, आलापुर, जलालपुर व भीटी क्षेत्र के भी एक भी क्रय केन्द्र पर टेंट, पेयजल व किसानों के बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं दिखती।
खरीद पर दिया जा रहा जोर
सभी क्रय केन्द्र प्रभारियों को निर्देशित किया गया है। बीते दिनों भंडारण को लेकर कुछ शिकायतें मिली थीं। इसके निस्तारण के लिए तेजी से कार्य चल रहा है। राइसमिलों पर धान को भेजने की प्रक्रिया चल रही है। जिन क्रय केंद्रों पर भंडारण की जगह न होने से खरीद ठप पड़ी है, वहां जल्द ही खरीद शुरू हो जाएगी। -अंशुमाली, शंकर खाद्य एवं विपणन अधिकारी