इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि लड़की बालिग है तो उसे अपनी पसंद के युवक से विवाह करने और उसके साथ रहने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की ओर से पेश रिपोर्ट के आधार पर उसे बालिग माना।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि लड़की बालिग है तो उसे अपनी पसंद के युवक से विवाह करने और उसके साथ रहने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की ओर से पेश रिपोर्ट के आधार पर उसे बालिग माना।
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कोर्ट ने मामले में नामजद चारों याचियों की गिरफ्तारी पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने आरती सिंह व तीन अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर दिया। मिर्जापुर के कोतवाली देहात थाने में लड़की के पिता ने याचियों के खिलाफ अपहरण और आपराधिक साजिश के तहत एफआईआर दर्ज कराई है। आरोप लगाया था कि उनकी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर ले गए।
कोर्ट ने 15 मई को लड़की की उम्र को लेकर प्रयागराज के मुख्य चिकित्साधिकारी के निर्देशन पर मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया था। कोर्ट के समक्ष मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से सीलबंद लिफाफे में मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। मेडिकल बोर्ड ने ऑसिफिकेशन टेस्ट और दंत परीक्षण के आधार पर लड़की की उम्र 18 वर्ष से अधिक और 20 वर्ष से कम आंकी। कोर्ट के समक्ष युवती ने बयान दिया कि उसने युवक के साथ शिवरात्रि के दिन शादी की है। अगली सुनवाई 27 मई को होगी।