प्राइवेट नौकरी करने वाले आरिफ के लिए यह बहुत ज्यादा था। इस बीच यह भी पता चला कि छात्रा के घर वालों ने आरिफ के खिलाफ बांसगांव थाने में अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया। सूचना के बाद दोनों लखनऊ पहुंचे। एक दो दिन रहने के बाद आगरा गए। फिर वहां से अजमेर चले गए। इस बीच उनके पास पैसे खत्म होने लगे थे। वे दोबारा लखनऊ पहुंचे और खुदकुशी का निर्णय ले लिया।
हालांकि छात्रा के समझाने पर दोनों ने निर्णय को एक दिन के लिए टाल दिया। आरिफ और छात्रा वकील से मिलने के लिए सात सितंबर को दोबारा प्रयागराज आ गए। यहां वकील से फिर बात की गई लेकिन कोई आश्वासन नहीं मिला। आरिफ बुरी तरह से टूट गया था। एफआईआर दर्ज हो गई थी। पैसे भी पास में नहीं थे। दूसरे धर्म का होने के कारण शादी भी कोर्ट में ही होनी थी। शाम को उसने छात्रा से फिर खुदकुशी की बात कही।
वह दवा की दुकान से जहर और इंजेक्शन ले आया और छात्रा के सोने के बाद उसने जहरीला इंजेक्शन लगाकर खुदकुशी कर ली। इंस्पेक्टर वीरेंद्र यादव ने बताया कि दोनों के घर वालों को बुलाया गया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। घर वालों के आने के बाद पोस्टमार्टम कराया जाएगा।
दोनों ने साथ में लिया था खुदकुशी का निर्णय
आरिफ और छात्रा बुधवार को प्रयागराज पहुंचे और हाईकोर्ट के सामने गुरु कृपा होटल का कमरा ले लिया। अपहरण की रिपोर्ट दर्ज होने और पैसे खत्म हो जान के कारण वह अवसाद में चला गया था। वह बार बार कह रहा था कि ‘दुनिया हमे मिलने नहीं देगी, लेकिन मौत एक कर देगी’।
खुदकुशी ही एकमात्र रास्ता है, लेकिन रात में छात्रा ने उसे काफी समझाया बुझाया। कहा कि सुबह एक बार और वकील से बात की जाएगी। हो सकता है कि कोई रास्ता निकल आए, लेकिन आरिफ के मन में कुछ और ही था। छात्रा के सोने के बाद उसने जहरीला इंजेक्शन लगा लिया। सुबह जब छात्रा सोकर उठी तो आरिफ के मुंह से झाग निकल रहा था। उसकी मौत हो चुकी थी। छात्रा चीखने लगी। पुलिस को सूचना दी गई।