हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर मुकदमा चलाए जाने की मांग में दाखिल निगरानी याचिका खारिज कर दी है। योगी पर 1999 में महराजगंज में हुई हिंसा की घटना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, जिस पर पुलिस फाइनल रिपोर्ट लगा चुकी है। इस रिपोर्ट के खिलाफ पुनरीक्षण अर्जी जिला न्यायालय से खारिज हो चुकी है। याचिका में जिला न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई थी।
समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता तलत अजीज की याचिका पर न्यायमूर्ति एसडी सिंह ने सुनवाई की। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याची चाहे तो जिला न्यायालय में अर्जी दाखिल कर अपनी बात कह सकता है। याची की ओर से अधिवक्ता एसएफए नकवी और प्रदेश सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल और एजीए प्रथम एके संड ने पक्ष रखा। याची तलत अजीज ने 11 फरवरी 1999 को योगी और उनके सहयोगियों के खिलाफ जानलेवा हमले और मारपीट सहित कई धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप है कि 10 फरवरी 1999 को शाम सात बजे योगी का काफिला एक जनसभा से लौट रहा था। रास्ते में उनके सहयोगियों ने जान से मारने की नीयत से फायरिंग की, जिसमें उसके गनर सत्यप्रकाश की मौत हो गई। योगी आदित्यनाथ की ओर से भी इसी मामले में क्रॉस एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इंस्पेक्टर कोतवाली ने भी एक मुकदमा दर्ज कराया था।
बाद में जांच सीबीसीआईडी को स्थानांतरित हो गई और सीबीसीआईडी ने मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। फाइनल रिपोर्ट के खिलाफ प्रोटेस्ट अर्जी दाखिल की गई जिसे 13 मार्च 2018 को सीजेएम महराजगंज ने खारिज कर दिया। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। सरकारी अधिवक्ता कहना था कि योगी आदित्यनाथ द्वारा दर्ज क्रॉस मुकदमे में भी फाइनल रिपोर्ट लगी थी, जिसके विरुद्ध रिवीजन जिला जज की अदालत में लंबित है। कोर्ट ने कहा कि याची चाहे तो अपना पक्ष जिला न्यायालय में रख सकता है।