इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ अफसरों के अलावा कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार नीलकंठ तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष रेखा सिंह, सांसद डॉ. रीता बहुगुणा जोशी, केशरी देवी पटेल, विनोद सोनकर, विधायक हर्षवर्धन बाजपेई आदि मौजूद रहे।
ये दिए निर्देश
- बाढ़ में फंसे अधिक से अधिक लोगों को राहत शिविरों में लाया जाए।
- बाढ़ से जूझ रहे लोगों तक आटा, चावल, बिस्किट दूध आदि पहुंचाया जाए।
- जनहानि होने पर 24 घंटे में राहत पहुंचाने और मुआवजा दें।
- पशुओं को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए प्रशासन।
दो से तीन दिन में बाढ़ से मिलेगी राहत
बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ से दो से तीन दिन में राहत मिलने की संभावना है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश और राजस्थान की नदियों के पानी की वजह से यमुना का जल स्तर बढ़ रहा है। लेकिन अब अच्छे संकेत मिल रहे हैं, जल्द ही पानी घटने लगेगा। इसके बाद दो से तीन दिनों में बाढ़ के पानी के निकलने की उम्मीद है।
राहत में न होने पाए कोई लापरवाही
सीएम ने रवाना होने से पहले पुलिस लाइन हैलीपैड पर ही अफसरों से वार्ता की। उन्होंने मंडलायुक्त और डीएम को राहत कार्य में किसी तरह की कमी न रहने की हिदायत भी दी। उन्होंने कहा कि निर्देशों के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों और शिविरों में लोगों को राहत पहुंच रही है या नहीं, इस पर लगातार निगरानी रखी जाए। उन्होंने अफसरों को स्थिति से लगातार अवगत कराते रहने का निर्देश दिया।