योग सिखाने के लिए योग गुरुओं को नियुक्ति किया जाए या जो पीटीआई शिक्षक नियुक्त हैं, उन्हें योग क्रियाओं में दक्ष बनाने पर विचार किया जाए। इसके अलावा तकनीकी, व्यावसायिक एवं कौशल विकास से संबंधित पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाएं। सांसद के इस पत्र के बाद शासन स्तर से राज्य विश्वविद्यालयों को पत्र जारी योग की शिक्षा शुरू करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही तकनीकी, व्यावसायिक एवं कौशल विकास संबंधी पाठ्यक्रम शुरू करने को कहा गया था।
विश्वविद्यालय में योग की पढ़ाई शुरू होने से पहले शिक्षकों के पद सृजित कर उनकी भर्ती की जाएगी। शासन ने विश्वविद्यालयों से योग, तकनीकी, व्यावसायिक एवं कौशल विकास से संबंधित पाठ्यक्रमों की जानकारी मतांगी है। इस बारे में राज्य विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार शेषनाथ पांडेय की ओर से उच्च शिक्षा के उपसचिव को पत्र भेजकर अवगत कराया गया है कि प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय एक नवस्थापित विश्वविद्यालय है। वर्तमान में विश्वविद्यालय परिसर में योग, तकनीकी, व्यावसायिक एवं कौशल विकास से संबंधित पाठ्यक्रम संचालित नहीं हैं।
शासन के निर्देश के अनुपालन में विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों में योग शिक्षा अनिवार्य करने एवं योग गुरुओं की नियुक्ति की कार्यवाही जल्द ही संपन्न कराई जाएगी। साथ ही इस कार्यवाही से शासन को अवगत कराया जाएगा। उधर, योग की पढ़ाई अनिवार्य किए जाने से दर्शनशास्त्र के विद्यार्थियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। दर्शनशास्त्र के विद्यार्थियों का कहना है कि आधुनिक समय में योग को सिर्फ आसनों तक सीमित कर दिया गया है, जबकि योग के अंतर्गत शरीर, मन, आत्मा इन तीनों का वृहद ज्ञान आवश्यक है, जो दर्शनशास्त्र के माध्यम से ही संभव है।