आयोजन स्थल पर सभी की थी सहमति
संजय ने कहा कि कुश्ती की राष्ट्रीय प्रतियोगिता कराने के लिए संघ की बैठक हुई थी। 31 दिसंबर से पहले प्रतियोगिता करानी थी। महज आठ दिन में कोई भी आयोजन कराने को तैयार नहीं था। इसलिए सभी ने राय दिया कि नंदनीनगर गोंडा में टाटा और साईं का सेंटर है। वहां, आयोजन हो सकता है। इसके बाद ही वहां पर आयोजन कराए जाने का निर्णय लिया गया है।
बिना ट्रायल के जाने का दिख गया परिणाम
संजय ने कहा कि कुछ लोग बिना ट्रायल के ही देश का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं। विश्व कुश्ती चैंपियनशिप-2023 में अंतिम पंघाल ट्रायल में चुनकर गई तो वह कांस्य पदक लेकर लौटी। वहीं, एक महाशय (बजरंग पुनिया) 10-0 से हारकर लौटे। परिणाम तो सामने है।
कोर्ट से मिला न्याय, तो करेंगे ये काम
संजय ने कहा कि उनकी संस्था को न्याय अदालत से जरूर मिलेगा। वह न्याय पाने के बाद कुश्ती के खेल को बढ़ावा देने के लिए सबसे पहले राष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित करेंगे। इसके बाद अच्छे खिलाड़ियों को कैंप में लाकर ओलपिंक क्वालीफाईंग की तैयारी कराएंगे। खिलाड़ियों को पिछले 12 महीनों से कोई प्रतियोगिता नहीं मिल सकी है।
टकराव बड़े खिलाड़ियों से नहीं, तीन लोगों से
संजय ने कहा कि संघ का टकराव किसी भी खिलाड़ी से नहीं है। टकराव उन तीन खिलाड़ियों से है, जो चाहते हैं कि कुश्ती के खेल में उन्होंने जो मुकाम हासिल कर लिया वहां तक कोई न पहुंच सके। वह जूनियर खिलाड़ियों को आगे नहीं आने देना चाहते हैं।
दबदबा है, दबदबा तो रहेगा को तोड़मरोड़ कर किया गया पेश
संजय सिंह ने कहा कि बृजभूषण सिंह के बयान को तोड़मरोड़ कर पेश किया गया है। उन्होंने दावा किया था कि कुश्ती के खेल में जो पहलवानों का दबदबा है वह हमेशा रहेगा। ओलंपिक में भारत कुश्ती के लिए फिर पदक जीतेगा। इस दबदबे की बात हुई थी, जिसे कुछ और ही समझा गया है। ओलंपिक में भारत कई खेलों में प्रतिभाग करता है, लेकिन लोगों को पदक की आस कुश्ती से जरूर रहती है। यह दबदबा है।