डाक सेवा का स्वरूप आज बेशक बहुत बदल चुका है, लेकिन ब्रितानिया हुकूमत के उस दौर में यह एक क्रांतिकारी शुरुआत थी। प्रयागराज के कारण ही विश्व में भारतीय डाक सेवा की अलग पहचान बनी। तब, फ्रेंच पायलट ने हवाई अड्डे से उड़ान भरी और यमुना नदी को पार करते हुए करीब 15 किलोमीटर का सफर तय किया था।
देश में पहली हवाई डाक सेवा की शुरुआत प्रयागराज में ही महाकुंभ के दौरान हुई थी। यह तारीख थी 18 फरवरी 1911। इसके साक्षी तीर्थनगरी में पधारे लाखों श्रद्धालु भी बने थे। इलाहाबाद से नैनी के बीच की इस सेवा का शुल्क छह आना था। इससे हुई आय ऑक्सफोर्ड एंड कैंब्रिज हॉस्टल (अब इलाहाबाद विश्वविद्यालय) को दान की गई थी।
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डाक सेवा का स्वरूप आज बेशक बहुत बदल चुका है, लेकिन ब्रितानिया हुकूमत के उस दौर में यह एक क्रांतिकारी शुरुआत थी। प्रयागराज के कारण ही विश्व में भारतीय डाक सेवा की अलग पहचान बनी। तब, फ्रेंच पायलट ने हवाई अड्डे से उड़ान भरी और यमुना नदी को पार करते हुए करीब 15 किलोमीटर का सफर तय किया था। यह विमान नैनी जंक्शन के नजदीक उतरा था।
डाक विभाग के पीआरओ राजेश वर्मा के मुताबिक, पहली हवाई डाक सेवा का शुल्क छह आना रखा गया था। यानी, तकरीबन 37 पैसे। बाद में तो यह सिक्का ही प्रचलन से बाहर हो गया। मगर, पहली सांकेतिक डाक से हुई आय जरूर ऑक्सफोर्ड एंड कैंब्रिज हॉस्टल, इलाहाबाद को दान कर दी गई थी।
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इस सेवा के बाद देश के दूसरे हिस्सों में हवाई डाक भेजनी शुरू की गई। सौ बरस पार इस यात्रा और इसके संचालक विभाग ने तमाम उतार चढ़ाव देखे। मोबाइल फोन और कंप्यूटर के इंटरनेट वाले दाैर में ऐसा लगा मानों अब विभाग का अस्तित्व ही नहीं बचेगा। मगर, विभाग ने खुद को समय के साथ बदला और इंडिया पोस्ट पेमेंट सेवा की शुरुआत कर बैंकिंग सेक्टर में खुद को नए सिरे से स्थापित किया था।
काॅमन सर्विस सेेंटर शुरू कराए। आज भले ही इन्हें अपेक्षा के अनुरूप सफलता नहीं मिली हो, मगर आधार सेवा के अपडेट और पासपोर्ट जैसी सेवाओं के लिए यहां लंबी कतार लग रही है। आधार के लिए तो प्रयागराज के प्रधान डाकघर में ही पांच काउंटर बनाए गए हैं, जहां रोजाना 250 से अधिक लोग इसका लाभ उठा रहे हैं।