प्रदूषण पर जारी डब्ल्यूएचओ की फर्जी रिपोर्ट ने संगम नगरी की साख पर बट्टा लगाने की कोशिश की और उस पर मुहर लगाने का काम अब सरकारी महकमे कर रहे हैं। विकास कार्य के नाम पर शहर की सड़कें, पटरियां बेतहाशा खोदी जा रही हैं। कहीं सीवर लाइन बिछाने के नाम पर तो कहीं नाले-नाली का निर्माण और सुंदरीकरण के नाम पर सड़कें खोद डाली गई हैं। विभागों में आपसी तालमेल न होने और चरणबद्ध तरीके से काम करने के बजाए एक साथ सभी काम के लिए हो रही खोदाई की वजह से शहरी परेशान हैं। मुख्य बाजार, व्यस्त सड़कों पर जहां खोदाई की गई हैं, वहां जाम की समस्या बढ़ रही है। धंधा चौपट हो रहा है तो वहां रहने वाले लोग मिट्टी और धूल से परेशान हैं लेकिन संबंधित विभागों को आम शहरियों की इससे कोई लेना-देना नहीं है।
सिविल लाइंस में एडीए ने सुंदरीकरण के लिए पत्थर गिरजाघर से हनुमान मंदिर तक सड़क के दोनों ओर खोदाई करा दी। यह काम अभी चल रही रहा है कि इस बीच गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने नवाब यूसुफ रोड पर सीवर लाइन बिछाने के लिए सड़क खोद डाली। इन दोनों मुख्य सड़कों के बीच में चार लिंक रोड हैं। इकाई ने सीवर लाइन के लिए इन सड़कों को खोद डाला। इसके साथ सरदार पटेल मार्ग पर विवेकानंद चौराहा से हार्ट स्टफ चौराहा के बीच तथा ताशकंद मार्ग भी सीवर लाइन के लिए सड़क खोद दी गई। अकेले सिविल लाइंस में सड़क की चौतरफा खोदाई के कारण जाम की समस्या गंभीर हो गई।
इसके साथ महात्मा गांधी मार्ग, सरदार पटेल मार्ग, नवाब यूसुफ रोड समेत तकरीबन सभी सड़कों पर मिट्टी का ढेर और उससे उड़ती धूल का असर बाजार पर पड़ रहा है। तीनों मुख्य मार्गों पर दुकानों के आगे खोदाई की वजह से कारोबार बुरी तरह प्रभावित है। बड़े-बड़े गड्ढे और धूल के कारण ग्राहक दुकानों में घुस से कतरा रहे हैं।
शिवकुटी में भी स्थिति बद से बदतर हो गई है। यहां तेलियरगंज से गोविंदपुर की तरह आने वाली सड़क पर आरओबी से अपट्रॉन चौराहा तक सीवर लाइन बिछाने के बाद सड़क ऐसी ही छोड़ दी। इस बीच नगर निगम ने भी यहां नाले बनवाने के लिए खोदाई कराई। यह काम भी अधूरा पड़ा है। इसकी वजह से उधर से गुजरने वाले लोग बेहद परेशान हैं। सलोरी, अल्लापुर, मुट्टीगंज, कटघर आदि इलाकों का भी यही हाल है। सीवर लाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़कों के कारण लोग परेशान हैं।
शहर में जिस तरह से विकास के नाम पर सड़कों को खोदा गया है, उससे बाहर निकला मुहाल है। करेलाबाग में भी सड़क की खुदाई के बाद बेतरतीब तरीके से पाटा गया। इसकी वजह से काफी दिक्कत होती है। सुबह, दोपहर, शाम हर वक्त धूल उड़ती रहती है। शहर की सड़के न तो पैदल चलने लायक हैं और न ही गाड़ी से, पता नहीं किस तरह से विकास कार्य हो रहा है। इरफाना, शम्स नगर करेलाबाग
सड़कों का जो हाल है उसे देखकर लगता ही नहीं है कि शहर स्मार्ट बन रहा है। बल्कि स्थिति और ज्यादा खराब हो रही है। शहर में इतनी धूल है कि सुबह-शाम टहलना भी छोड़ दिया है। यही लगता है कि सेहत संवारने के बजाए खराब न हो जाए। शहर में विकास कार्य तो ऐसे होना चाहिए जिससे जनता को फायदा हो, नुकसान नहीं। राजेश वर्मा, अल्लापुर
समझ में ही नहीं आ रहा है कि सीवर लाइन का काम किस तरह हो रहा है। कभी सीवर लाइन तो कभी पेयजल पाइप लाइन के नाम पर सड़क खोद दी जाती है। आजकल सड़कों का जो हालत है, उसमें घर से निकलने के बारे में सोचना पड़ता है। सिविल लाइंस शहर के सबसे खास बाजारों में से है लेकिन सबसे ज्यादा खराब हालात तो वहीं की है। थोड़ी सी भी बारिश हो गई तो स्थिति और बदतर हो जाएगी। आस्था वर्मा, नया कटरा
सिविल लाइंस में सुंदरीकरण के नाम पर हो रही बेतरतीब खोदाई से कारोबार प्रभावित हो रहा है। सड़क दोनों ओर दुकानों के सामने काफी दूर तक गहरे गड्ढे खोद दिए गए हैं। इनका निर्माण कार्य काफी धीमी गति से हो रहा है। दुकानों के ठीक सामने बड़े-बड़े गड्ढों के कारण ग्राहक नहीं आ रहे हैं। इसकी वजह से एक माह में कारोबार काफी कम हो गया है। एक साथ खोदाई के बजाए थोड़ी-थोड़ी दूर खोदाई और उसमें निर्माण कार्य करते हुए आगे काम होता रहता तो समस्या कम होती और कारोबार भी प्रभावित न होता। अजीत श्रीवास्तव, रेडीमेड कपड़ा व्यापारी
जगह-जगह मिट्टी, बालू के ढेर के कारण पूरे सिविल लाइंस में धूल भरी रहती है। इसकी वजह से लोग ग्राहक दुकानों में आने से कतराने लगे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर रेस्टोरेंट और खाने-पीने की दुकानों पर पड़ रहा है। धूल की वजह से ऐसे दुकानदारों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सिविल लाइंस में सुंदरीकरण से तकरीबन सब दुकानदार प्रभावित हो रहे हैं। समर जायसवाल, कारोबारी