पहली बार संगमनगरी आईं भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज ने कहा कि आज भी देश में क्रिकेट की ओर महिला खिलाड़ियों का रुझान कम है। महिला क्रिकेट में अभी कई सुधार की जरूरत है। दाएं हाथ की शानदार बल्लेबाज और गेंदबाजी की कला में माहिर महिला टीम की कप्तान मिताली राज शहर में हो रहे अखिल भारतीय रेलवे महिला क्रिकेट में प्रतिभाग करने आईं हैं।
मिताली ने कहा कि महिला क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए देश में समय-समय पर क्रिकेट प्रतियोगिताएं आयोजित हों। उनके लिए आईपीएल मैचों की रूपरेखा भी तैयार होनी चाहिए। साथ ही अलग-अलग प्रांतों में होने वाली महिला रणजी क्रिकेट प्रतियोगिताओं का सीधा प्रसारण भी दिखाया जाना चाहिए। ऐसा होने पर देश की प्रतिभाएं सामने आएंगी। उनका मानना है कि बीसीसीआई और वीमेंस क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ इंडिया की कोशिशों से अब कुछ सुधार होते दिख रहे हैं, लेकिन जितनी अहमियत महिला खिलाड़ियों को मिलनी चाहिए अभी उतनी मिल नहीं पा रही।
बातचीत के दौरान उन्होंने 1999 में इंग्लैंड दौरे की यादें भी सांझा कीं, जब उन्होेंने नाबाद पारी खेल कर 114 रन बनाए थे। 2005 में ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए वर्ल्ड कप में मिताली ने 209 रन बनाकर ऑस्ट्रेलिया की महिला खिलाड़ी करेन बोल्टन का रिकार्ड भी तोड़ दिया, लेकिन सफलता उनके हाथ नहीं लग सकी। वर्ष 2010, 2011 और 2012 में आईसीसी वर्ल्ड रैंकिंग में प्रथम स्थान भी प्राप्त किया। मिताली ने बताया कि पापा डोराई राज की प्रेरणा और खुद की मेहनत से वह यहां तक पहुंचीं। फिलहाल वह वर्ष 2017 में होने वाले महिला क्रिकेट के विश्व कप की तैयारी में हैं। वर्तमान में मिताली हैदराबाद के चीफ ओएस के पद पर कार्यरत हैं।
क्रिकेट के क्षेत्र में कदम रखने से पहले मिताली राज की रुचि भरतनाट्यम नृत्य में थी। उन्होंने भरतनाट्यम की ट्रेनिंंग ली और कई स्टेज प्रोग्राम भी किए। लेकिन धीरे-धीरे उनका मन क्रिकेट में रमने लगा और वह भरतनाट्यम की क्लास में कम जाने लगीं। बताया कि तब नृत्य शिक्षक ने भरतनाट्यम नृत्य और क्रिकेट में से किसी एक को चुनने की बात की। छोटी उम्र में मिताली के लिए यह फैसला ले पाना कठिन था, तब उन्होंने ये बातें पापा को बताईं और उन्होंने उनकी प्रेरणा और खुद की मेहनत से मिताली महिला क्रिकेट की एक जगमगाता सितारा बनाकर सामने आईं। मिताली को पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।