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महिला उत्पीड़न-डिमोट किए गए एसो. प्रोफेसर, जीसी त्रिपाठी का मामला डीन कॉमर्स को सौंपा

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Woman Assault: Associate Professor demoted. - फोटो : ALDCOMPACT
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महिला उत्पीड़न के आरोप पर एसो. प्रोफेसर पदावनत
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महिला शिक्षकों की ओर से लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों के मद्देनजर हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सूर्य नारायण की पदावनति असिस्टेंट प्रोफेसर के पद कर दी गई है, जबकि बीएचयू के पूर्व कुलपति एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो. जीसी त्रिपाठी का मामला डीन कॉमर्स को सौंप दिया गया है। यह निर्णय शनिवार को हुई इविवि की कार्य परिषद की बैठक में लिया गया।
हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सूर्य नारायण के खिलाफ विभाग की एक पूर्व महिला अतिथि प्रवक्ता ने यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। मामले में प्रो. संगीता श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली सी-कैश कमेटी ने जांच की थी और डॉ. सूर्य नारायण को दोषी पाया था। इसके अलावा एक पूर्व न्यायमूर्ति से भी मामले की जांच कराई गई थी और उनकी जांच में भी डॉ. सूर्य नारायण दोषी पाए गए थे। शनिवार को कार्य परिषद की बैठक में यह मामला रखा गया। उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने पर भी चर्चा हुई, लेकिन अंत में उनको असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर डिमोट (पदावनत) करने का फैसला किया गया।
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वहीं, अर्थशास्त्र विभाग के हेड प्रो. जीसी त्रिपाठी का मामला डीन कॉमर्स प्रो. असीम मुखर्जी को सौंपा गया है। प्रो. जीसी त्रिपाठी के विभाग की एक महिला शिक्षक ने सात मई 2019 को कुलपति को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि प्रो. त्रिपाठी उन्हें सार्वजनिक तौर पर सहयोगियों के बीच अपमानित करते हैं, अपशब्दों का प्रयोग करते हैं और उन्हें लक्ष्य करके द्विअर्थी बातें की जाती हैं। कार्य परिषद ने बहुमत से निर्णय लिया कि मामला डीन कॉमर्स प्रो. असीम मुखर्जी के पास भेजा जाएगा और वह अपने स्तर से इसे सुलझाएंगे। अगर वह ऐसा नहीं कर पाते हैं तो कार्य परिषद को बताएंगे और इसके बाद कार्य परिषद अपने स्तर से निर्णय लेगी। हालांकि कुछ सदस्यों ने इस निर्णय का विरोध किया और कहा कि प्रो. मुखर्जी एवं प्रो. त्रिपाठी की फैकल्टी एक है। प्रो. मुखर्जी निष्पक्ष जांच नहीं कर पाएंगे। एक सदस्य ने प्रस्ताव रखा कि किसी बाहरी व्यक्ति से जांच कराई जाए, लेकिन इस पर बहुमत नहीं बना।
नए शिक्षकों को नियमित करने का रास्ता साफ
- इविवि में हिंदी विभाग समेत अन्य विभागों में नव नियुक्ति शिक्षकों को नियमित करने का रास्ता साफ हो गया है। हिंदी विभाग में नियुक्त शिक्षकों की परिवीक्षा अवधि को अभी एक साल पूरा नहीं हुआ है। दो-तीन दिनों में उनकी परिवीक्षा अविधि पूरी हो रही है, सो निर्णय लिया गया कि जिन शिक्षकों का एक साल पूरा होने जा रहा है और उनके खिलाफ किसी तरह की शिकायत नहीं है, उन्हें नियमित करने का पत्र जारी कर दिया जाए और कार्य परिषद की अगली बैठक में इस बाबत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
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अब एक पद के मुकाबले बुलाए जाएंगे 15 अभ्यर्थी
- इविवि में शिक्षक भर्ती के लिए विज्ञापन जारी हो चुका है, आवेदन भी लिए जा चुके हैं लेकिन यूजीसी ने भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। कार्य परिषद की बैठक में तय हुआ कि भविष्य में अब भी भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी, तब इंटरव्यू के लिए एक पद के मुकाबले दस की जगह 15 अभ्यर्थियों को बुलाया जाएगा।
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