बरेली/मीरगंज। नेपाल के जंगल से यहां पहुंचे दो हाथियों को काबू करने के लिए लखीमपुर के दुधवा नेशनल पार्क से मंगाए गए चार हाथियों में से एक नर हाथी ‘गजराज’ शनिवार सुबह बिगड़ गया। चारा देने पहुंचे सह महावत रामऔतार पर चारे का गट्ठर पटक दिया। महावत ब्रम्हादीन उसका हाल जानने पहुंचा तो उस पर भी हमलावर हो गया। भीड़ देखकर गजराज बिगड़ न जाए.. इसलिए परचई में शनिवार को लगने वाली साप्ताहिक बाजार हटवा दी गई। फिलहाल उसके चारों पैर बांधकर अन्य हाथियों से अलग रखा गया है।
नेपाल से पहुंचे दो नर हाथियों को खदेड़ कर जंगल तक पहुंचाने में मदद के लिए दुधवा नेशनल पार्क से तीन मादा और एक नर हाथी को चार दिन पहले बुलाया गया था। शुक्रवार को दोनों जंगली हाथी परचई गांव के निकट पहुंचे तो दुधवा के इन चारों हाथियों को भी परचई गांव में हांका के लिए पहुंचा दिया गया। शनिवार सुबह इन हाथियों को सह महावत रामऔतार जब चारा डालने गया तो चारों हाथियों में से नर हाथी ‘गजराज’ का मिजाज कुछ गर्म दिखाई दिया। उसने चारा के गठ्ठर को सूड़ से उठाया और रामऔतार पर पटक दिया। इससे वह जमीन पर गिर गया। गनीमत यह थी कि वहां पानी भरा हुआ था, जिसके चलते उसके अधिक चोट नहीं आई। कुछ दूरी पर खड़ा महावत ब्रह्मादीन जब आगे बढ़ा तो गजराज उस पर भी हमलावर हो गय। दोनों ने किसी तरह पीछे हट कर जान बचाई। गजराज के मूड को भांप दोनों ने अन्य महावतों के सहयोग से गजराज के चारों पैर रस्सी से बांध कर उसे एक पेड़ में बांध दिया। अन्य हाथियों को तुरंत उससे अलग किया गया। सूचना मिलते ही दुधवा नेशनल पार्क के वन्यजीव प्रतिपालक अमरेश व चिकित्सक डा. दया शंकर मौके पर पहुंच गए। शनिवार को परचई गांव में साप्ताहिक बाजार लगती है। भीड़ देख गजराज बिगड़ सकता था। लिहाजा अभियान का नेतृत्व कर रहे मुख्य वन संरक्षक पीपी सिंह ने एसडीएम मीरंगज को घटना की जानकारी देते हुए उनसे बाजार न लगने देने का अनुरोध किया। एसडीएम के निर्देश पर थाना शाही पुलिस ने मौके पर पहुंच कर बाजार हटवा दी। घटना के बाद से दुधवा प्रशासन ने तीनों मादा हाथियों गंगाकली, सुलोचना व चमेली को गजराज से अलग रखा गया है। डा. दया शंकर ने गजराज के गर्म मूड को ठंडा करने के लिए केले के पेड़ में लपेट कर दवा की भी एक डोज दी है।
‘दुधवा का गजराज पिछले कई दिन से नेपाल के जंगल से आए दोनों नर हाथियों की गंध को अपने लिए खतरा मान रहा है। इस लिए उसका मिजाज बिगड़ गया है। उम्मीद है कि एक दो दिन में वह नार्मल स्थिति में आ जाएगा। उसके बाद उसे दुधवा वापस भेज दिया जाएगा। शेष
तीनों मादा हाथियों का ही उपयोग अभियान के तहत अब किया जाएगा।’
- पीपी सिंह, मुख्य वन संरक्षक, झांसी