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गांव सभा के प्रस्तावों पर क्यों नहीं होते ग्राम पंचायत सदस्यों के हस्ताक्षर, हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब

Fri, 23 Oct 2020 09:22 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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court - फोटो : सोशल मीडिया
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पंचायत राज नियमावली की गंभीर खामियों को उजागर करने वाली जनहित याचिका पर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि गांव सभा के प्रस्तावों पर सदस्यों के हस्ताक्षर अनिवार्य क्यों नहीं हैं।  कोर्ट ने कहा कि संविधान के भाग नौ में  73 वे संविधान संशोधन द्वारा गांव सभा को पूर्ण संवैधानिक दर्जा दिया गया  है । ऐसे में इसके क्रियाकलापों में संविधान की मंशा के अनुरूप कार्य न होकर मनमानी तरीके काम करना आश्चर्यजनक है। 
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कोर्ट ने कहा कि सरकार बताए कि गांव सभा में पारित हो रहे प्रस्तावों पर सदस्यों के हस्ताक्षर बगैर उनकी  सहमति कैसे मानी जा सकती है । कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रस्तावों  का दुरुपयोग करने पर जिम्मेदारी कैसे तय होगी ।

जौनपुर के मुकेश सिंह की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति गोविन्द माथुर व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। । याची के अधिवक्ता आरके सिंह का कहना था कि गांव सभा की हर बैठक में भाग लेने के लिए सदस्यों की  उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए और बैठक के प्रस्तावों पर सदस्यों के हस्ताक्षर की अनिवार्यता का प्रावधान रखा जाए ।
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कहा गया है कि कानून की इन कमियों का गांव सभा स्तर पर प्रदेश भर में जमकर  दुरुपयोग किया जा रही है ।  यही  वजह है कि गाँव सभा स्तर पर भ्रष्टाचार जैसी आपराधिक घटनाओं में दिनों दिन वृद्धि हो रही है । कहा गया है कि पंचायत राज नियमावली में कमी के कारण संविधान की भावनाओं  के अनुरूप गांव सभा में कार्य नहीं हो रहा है ।कोर्ट ने इस जनहित याचिका पर यूपी सरकार से जवाब तलब किया है और सुनवाई के लिए 20 नवंबर की तिथि नियत की है ।
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