स्थानीय निकाय चुनाव समय पर कराने के बजाए प्रशासकों को चेयरमैन का चार्ज दिए जाने पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि स्थानीय निकाय चुनाव कराने में क्योें विलंब किया जा रहा है। गीता शर्मा सहित गौतमबुद्ध नगर, अमरोह आदि जिलों के 21 नगर पालिका और नगर पंचायत अध्यक्षों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर 15 जुलाई को जारी शासनादेश को चुनौती दी है। याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति एमके गुप्ता की पीठ सुनवाई कर रही है। वरिष्ठ अधिवक्ता एमडी सिंह शेखर ने याचीगण का पक्ष रखा।
कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि वह शुक्रवार तक यह बताए कि स्थानीय निकाय चुनाव कब कराया जाएगा। चुनाव कराने के लिए इतना अधिक समय क्यों लिया जा रहा है। याचिका में कहा गया है कि नगर निगम कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त होने पर सरकार चुनाव कराने के बजाए नगर निगम में प्रशासक और नगर पंचायतों में अधिशासी अधिकारी को चेयरमैन का चार्ज देने जा रही है। समय से चुनाव न कराना संविधान के अनुच्छेद 243 यू और म्युनिस्पलटीज एक्ट की धारा 10ए का उल्लंघन है।
याचीगण का कहना था कि समय से चुनाव कराना सरकार की जिम्मेदारी है। वोटर लिस्ट तैयार नहीं होने और परिसीमन के नाम पर चुनाव टालने का बहाना नहीं बनाया जा सकता है। नियमानुसार निकाय कार्यकारिणी की पहली बैठक से पांच वर्ष पूरा होने से पूर्व नए चुनाव करा लेने चाहिए मगर प्रदेश सरकार चुनाव को लंबा टालने की तैयारी में दिख रही है। कोर्ट ने 21 जुलाई को बताने के लिए कहा है कि सरकार स्थानीय चुनाव कब कराएगी।