मामले मेंयाची उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ग्राम विकास अधिकारी भर्ती 2016 की लिखित व शारीरिक दक्षता परीक्षा में सफल घोषित हुई। किंतु यह कहते हुए उसे साक्षात्कार में नहीं बुलाया गया कि वह ट्रिपल सी की अर्हता नहीं रखती। इसके खिलाफ याचिका खारिज हो गई तो विशेष अपील दाखिल की गई। सरकार की तरफ से कहा गया कि ग्राम विकास अधिकारी सेवा नियमावली के तहत पद की योग्यता इंटरमीडिएट या समकक्ष डिग्री है, ट्रिपल सी अनिवार्य अर्हता नहीं है।
खंडपीठ ने याची का साक्षात्कार लेकर परिणाम से अवगत कराने का आदेश दिया। याची को साक्षात्कार के बाद सफल घोषित कर आयोग ने आयुक्त को नियुक्ति करने की संस्तुति की। पालन न करने पर अवमानना याचिका पर कहा, खंडपीठ ने नियुक्ति का निर्देश नहीं दिया है। खंडपीठ के आदेश की वापसी की अर्जी खारिज कर दी गई। याची की ओर से नियुक्ति के प्रत्यावेदन के बाद ट्रिपल सी न होने का कारण बताते हुए उसे खारिज कर दिया गया तो दोबारा याचिका दायर की गई।
याची का तर्क था कि सरकार के यह मानने के बाद कि ट्रिपल सी अनिवार्य अर्हता नहीं है, कोर्ट ने याची की नियुक्ति का आदेश दिया है। सरकार ने आदेश वापस लेने की अर्जी दी जिसे दिग्भ्रमित मानते हुए खारिज कर दिया गया। अंतिम आदेश को सरकार ने चुनौती नहीं दी है। कोर्ट ने यह कहते हुए कि सरकार अपनी बात से मुकर नहीं सकती,नियुक्ति का आदेश दिया है।