प्रयागराज। सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में मंसूर अली पार्क में हो रहा महिलाओं का प्रदर्शन 13वें दिन भी जारी रहा। वक्ताओं ने तरह-तरह जुमलों, नारों और शेराें से प्रदर्शनकारियों में जोश भरा। कोई वक्ता कहता है, ‘हमें न चाहिए सीएए, हमें न चाहिए एनआरसी, हम हैं इस देश के वासी, सुन ले मोदी, सुन ले योगी।’ तो किसी ने शायर मजाज़ लखनवी के शेर को अपने अंदाज में कहा, ‘हमने अपने आंचल को बनाया है परचम...।’
सुबह दिन चढ़ने के साथ जोरदार होता गया प्रदर्शन देर रात तक चलता रहा। प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए कई मुहल्लों से महिलाएं जुलूस की शक्ल में मंसूरअली पार्क पहुंचीं और सीएए के खिलाफ आवाज बुलंद की। प्रदर्शन स्थल पर चारों ओर हजारों की संख्या में मौजूद पुरुषों ने भी महिलाओं की आवाजों को बुलंद किया। इकरा सिद्दकी ने कहा कि सरकार ने एक खास समुदाय को टारगेट कर सीएए में शामिल नहीं किया। इससे उनका मकसद साफ नजर आता है। आरफा ने कहा कि सरकार के मंसूबों को कभी कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। मोहम्मद सुफियान ने मुख्यमंत्री के बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई। कहा, हमें संविधान के साथ छेड़छाड़ मंजूर नहीं है। रोजी ने कहा सीएए और एनआरसी मुसलमानों के लिए ही नहीं सभी के लिए विरोधी है। उमरा ने कहा हम मोदी और शाह के इरादों को कभी कामयाब नहीं होने देंगे। इरशाद उल्ला ने कहा -
अपने पुरुषों की वतन परस्ती का सबूत ढूढ़ रहा हूं, इसी मुल्क में पैदा होकर वजूद ढूढ़ रहा हूं। सादिया ने कहा कि शाहीन बाग की तरह मंसूरअली पार्क का आंदोलन भी सीएए और एनआरसी की वापसी तक चलता रहेगा। इसी तरह मेहनाज, आसिफ अनीस, राकेश कुमार, नूर रिजवी, फैसल खान, सुधीर कुमार गौतम, अंशु मालवीय सहित कई वक्ताओं ने अपनी बात रखी। संचालन स्त्री अधिकार संगठन की नीशू ने किया। प्रदर्शन में हजारों की संख्या में महिलाएं और पुरुष मौजूद रहे।
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