गंगा-यमुना बुधवार को भी उफान पर रहीं। इससे दोनों नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से मात्र दो मीटर दूर रह गया है। लगातार वृद्धि होने से कछारी इलाकों में लोगों के घरों में पानी घुस गया है। छोटा बघाड़ा, सलोरी, दारागंज, झूंसी, फाफामऊ, सोनौटी बदरा समेत कई इलाकों में लोगों का घरों में रहना मुहाल हो गया है। सैकड़ों परिवार दूसरी जगहों पर चले गए हैं। उनका जीवन-यापन दूभर हो गया है। वहीं, डीएम संजय कुमार ने बुधवार को बाढ़ क्षेत्रों का दौरा कर सभी अफसरों को अलर्ट कर दिया है।
कलक्ट्रेट स्थित एडीएम वित्त एवं राजस्व कार्यालय में बाढ़ कंट्रोल रूम खोल दिया गया है। अगर किसी व्यक्ति को बाढ़ संबंधी सूचना देनी है तो फोन नंबर ‘0532-2641577’ या टोल फ्री नंबर ‘1077’ पर संपर्क कर सकता है। उत्तराखंड और मध्य प्रदेश से पानी छोड़े जाने के कारण जलस्तर में अभी दो दिनों तक वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। इससे जलस्तर खतरे के निशान को पार कर सकता है। बाढ़ के मद्देनजर दोनों नदियों में बड़ी नावों के संचालन पर रोक लगा दी गई है, जबकि छोटी नावों पर भी दो-तीन लोगों से अधिक नहीं बैठाने की हिदायत दी गई है। जल पुलिस एवं पीएसी के 15 गोताखोरों को पांच मोटर बोट, लाइफ जैकेट एवं अन्य संसाधनों के साथ तैनात कर दिया गया है।
फाफामऊ में मंगलवार को जलस्तर 82.28 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से सवा दो मीटर नीचे है। मंगलवार को फाफामऊ के जलस्तर में 32 सेमी. की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, छतनाग में 42 सेमी वृद्धि के साथ गंगा का जलस्तर 81.75 मीटर पर पहुंच गया, जबकि नैनी में 36 सेमी बढ़ोतरी के साथ यमुना का जलस्तर 82.42 मीटर दर्ज किया गया। डीएम संजय कुमार ने सिंचाई बाढ़ कार्य खंड और पंपिंग स्टेशन से जुड़े अभियंताओं को बाढ़ की स्थिति पर बराबर नजर रखने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही बाढ़ ग्रस्त इलाकों में निगरानी के लिए टीमें लगा दी गई हैं। कलक्ट्रेट स्थित एडीएम वित्त एवं राजस्व कार्यालय में बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना कर दी गई है, जो 24 घंटे काम करेगा। बाढ़ नियंत्रण कक्ष आठ-आठ घंटे की शिफ्ट में मजिस्ट्रेटों की ड्यूटी भी लगी दी गई है।