फ़रीद और निखत काज़मी की याद में फिल्म चर्चा
फ़रीद काज़मी और निखत काज़मी को याद कका गया। इस सत्र में सुधीर मिश्रा, नंदिता दास, सुतापा सिकदर, और क़ौसर मुनीर जैसी प्रमुख फिल्मी हस्तियां शामिल हुईं। चर्चा का प्रारंभ मिडिल ऑफ द रोड सिनेमा के भविष्य पर सुधीर मिश्रा ने किया। उन्होंने बिमल रॉय और सत्यजीत रे के दौर को इसका बेहतरीन उदाहरण बताया। नंदिता दास ने अच्छी फिल्मों को थिएटर में देखने का अनुरोध करते हुए कहा कि सिनेमा केवल ओटीटी प्लेटफॉर्म तक सीमित न हो।
सुतापा सिकदर ने समाज और संस्कृति पर सिनेमा के प्रभाव को रेखांकित किया। हिंदी सिनेमा और साहित्य के संबंध पर चर्चा करते हुए नंदिता दास ने कहा कि साहित्य आधारित फिल्में अक्सर क्षेत्रीय सिनेमा का हिस्सा मानकर मुख्यधारा से कम आंकी जाती हैं। सुधीर मिश्रा ने साहित्यिक फिल्मों के मूल भाव को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
जीवन ही सबसे बड़ा गुरु: विकास स्वरूप
प्रसिद्ध उपन्यासकार विकास स्वरूप ने अपने लेखन पर चर्चा की। उन्होंने सामाजिक थ्रिलर लेखन को अपनी विशेषता बताया। कहा कि "जीवन ही सबसे बड़ा गुरु है।" अपनी पुस्तक क्यू एंड ए और उसकी फिल्म स्लमडॉग मिलियनेयर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी रचनाएं समाधान और आशा के साथ समाप्त होती हैं।