बीच रास्ते में रोककर पीटा, फिर मांगी थी रंगदारी
कौशाम्बी के सरायअकिल स्थित भगवानपुर निवासी रामजीवन (48) का आरोप है कि उनकी पत्नी आशा देवी के नाम पर अहमदपुर पावन स्थित 8320 वर्गमीटर जमीन पर 2008-09 में कब्जा कर मुजफ्फर व उसके भाई ईंट भट्ठा संचालित करने लगे थे। पिछले साल पूरामुफ्ती पुलिस व जिला प्रशासन ने जमीन को मुक्त कराते हुए उसे सौंप दिया था। तभी से मुजफ्फर के भाई व सहयोगी लगातार उसे व उसके परिवार को जान से मारने और जबरन जमीन कब्जाने की धमकी दे रहे थे।
13 मई को जमानत पर रिहा होने के बाद से मुजफ्फर उसे फिर धमकाने लगा। जमीन देने के लिए दबाव बनाने लगा। 22 मई को वह बाइक से अपने साथी भीम पुत्र गुलाबचन्द्र निवासी भीखपुर मेंडवारा के साथ शहर जा रहा था। इसी दौरान मंदर मोड़ के आगे सफेद रंग के चारपहिया वाहन से पीछा करते हुए मुजफ्फर, अपने भाई अकरम, छोटे उर्फ अशरफ, जावेद अहमद, आजम व अन्य सहयोगियों संग आया और उसे रोक लिया। फिर मारापीटा और एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी।
30 से ज्यादा केस, जेल से जीता था चुनाव
नवाबगंज के चफरी का मूल निवासी मुजफ्फर अंतरजनपदीय गोतस्कर गिरोह का सरगना है। उसे 2021 में पूरामुफ्ती थाने में दर्ज गैंगस्टर के मामले में जेल भेजा गया था, जिसमें वह पिछले महीने ही जमानत पर छूटा है। इससे पहले भी वह जेल जा चुका है। जेल में ही रहकर उसने ब्लॉक प्रमुख का चुनाव जीता था। उस पर प्रयागराज के अलावा वाराणसी, कौशाम्बी, फतेहपुर, भदोही व चंदौली में 30 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। पिछले साल नवंबर में तत्कालीन एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय के नेतृत्व में उसकी 10 करोड़ की संपत्ति कुर्क की गई थी। इससे पहले भी अभियान चलाकर उसकी करोड़ों रुपये की संपत्तियां कुर्क करने की कार्रवाई हुई थी।