याची ने कूट रचित दस्तावेज तैयार करने, सरकारी दस्तावेज बिना प्राधिकार के नष्ट करने के आरोप में धूमनगंज थाने में शिकायत की। सुनवाई न होने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष अर्जी दी। मजिस्ट्रेट ने कहा लोक सेवक के विरुद्ध सरकार या विभाग की अनुमति लिए बगैर आपराधिक केस दर्ज नहीं किया जा सकता और अर्जी खारिज कर दी। जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
याची ने कोर्ट के समक्ष सुप्रीम कोर्ट के इंस्पेक्टर ऑफ पुलिस व अन्य बनाम बटेनापाटला वेंकेट रत्नम व अन्य के केस में दिए गए आदेश का हवाला दिया। कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह जरूरी नहीं है। इस पर कोर्ट ने याची अधिवक्ता से आदेश की फोटोकॉपी सरकारी अधिवक्ता को मुहैया कराने को कहा और पूछा कि क्या ऐसा है। यह एक कानूनी सवाल है। विचारणीय है। सरकारी अधिवक्ता बताएं कि क्या सरकार की अनुमति के बगैर सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया जा सकता है।