इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके मल्टीनेशनल कंपनियों में मोटे पैकेज पर नौकरी करने तथा विदेश जाने का तिलिस्म अब टूटने लगा है। यूपी बोर्ड के मेधावी सिविल सेवा में जाकर देश की सेवा करना चाहते हैं। इंटरमीडिएट में जिले की मेरिट में आठवां स्थान प्राप्त करने वाली बुशरा नाज अंसारी न्यायिक सेवा में जाना चाहती हैं। जो मेधावी इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना चाहते हैं उनका भी अंतिम लक्ष्य आईएएस बनना है। बीटेक करने का उनका मकसद कॅरियर सुरक्षित करना है। इसके अलावा सिविल सेवा की तैयारी में इसे वे एक विषय के रूप में भी रखना चाहते हैं।
एक दौर था जब विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों की पहली पसंद इंजीनियर या डॉक्टर बनना हुआ करता था लेकिन अब ये हॉट कोर्स नहीं रह गए हैं। वर्तमान सत्र में तो एनआईटीज जैसे संस्थानों में बीटेक की सीटें खाली रह गईं तो निजी कालेजों के बंद होने का क्रम भी शुरू है। कॅरियर को लेकर यूपी बोर्ड के मेधावियों की पसंद को देखते हुए आने वाले समय में भी इंजीनियरिंग कालेजों के अच्छे दिन लौटते नहीं दिख रहे।
हाईस्कूल में जिले की टॉपर अनामिका तिवारी सिविल सेवा में जाना चाहती हैं। दूसरे स्थान पर रहने वाली स्वाति मौर्या का भी सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य है। पांचवां स्थान प्राप्त करने वाले सुमित सिंह इंजीनियरिंग करना चाहते हैं लेकिन इसके बाद उनका भी लक्ष्य सिविल सेवा में जाने का है। बारहवीं में 12वीं रैंक हासिल करने वाले प्रिंस कुमार यादव भी सिविल सेवा में जाना चाहते हैं। इसी तरह से जिले की टॉप टेन के ज्यादातर विद्यार्थियों ने सिविल सेवा में जाने की इच्छा जताई है।