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High Court : जोया नाम से ऑनलाइन लूडो खेलने वाली विनीता निकली दो बच्चों की मां मोमिना बानो, एफआईआर का आदेश

Thu, 29 Jun 2023 06:00 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

ऑनलाइन चैटिंग के दौरान इस महिला ने खुद का नाम विनीता बताया था। युवक से आए दिन पैसे मांगने और शादी का दबाव डालने पर छानबीन की तो उसकी असलियत सामने आई।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सऊदी अरब में नौकरी कर रहे औरैया निवासी युवक की शिकायत पर जोया के नाम से ऑनलाइन लूडो खेल कर लोगों को लूटने वाली दो बच्चों की मां मोमिना बानो के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। ऑनलाइन चैटिंग के दौरान इस महिला ने खुद का नाम विनीता बताया था। युवक से आए दिन पैसे मांगने और शादी का दबाव डालने पर छानबीन की तो उसकी असलियत सामने आई।

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनीस कुमार गुप्ता ने सऊदी अरब में नौकरी कर रहे रामचंद्र की याचिका पर यह फैसला दिया। याची रामचंद्र मूल रूप से औरैया जिले के दिबियापुर थाना क्षेत्र का रहने वाला है। अपर सत्र न्यायाधीश औरैया द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156 (3) के तहत रामचंद्र के प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में स्वीकार करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

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याची के मुताबिक कोराना काल के दौरान ऑनलाइन लूडो खेलते हुए जोया नाम की आईडी से दोस्त बनी महिला ने अपना नाम विनीता बताया। यहां से दोस्ती चलती रही। सऊदी अरब से भारत लौटने पर विनीता के बुलावे पर वह विंध्याचल धाम दर्शन करने भी पहुंचा था। सऊदी अरब लौट जाने पर महिला ने फोन पर शादी का प्रस्ताव दिया, जिसे ठुकराने पर वह ब्लैकमेल करने लगी। 40 हजार रुपये खाते में ट्रांसफर भी कर दिए, लेकिन फिर वह दो लाख रुपये मांग करने लगी।

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बढ़ती मांग से तंग युवक ने शादी करने का मन बना लिया, लेकिन जब उसने छानबीन की तो पता लगा कि विनीता असल में दो बच्चों की मां मोमिना बानो है। मोमिना की बहन मरियम मुस्कान पर भी भदोही जिले में एक किशोरी के बेचने का मुकदमा दर्ज है। इतना जानकर उसने शादी से साफ इन्कार कर दिया। याची के अधिवक्ता विनय कुमार मिश्रा के मुताबिक शादी से इन्कार करने पर जालसाज महिला ने तीन साथियों के साथ युवक के घर पर धावा बोल दिया। घर में घुसकर मारपीट, तोड़फोड़ और लूटपाट की।

पुलिस ने इसकी एफआईआर नहीं लिखी तो युवक ने अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया। अदालत ने प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में स्वीकार किया, जबकि संज्ञेय अपराध होने के कारण एफआईआर दर्ज कराकर विवेचना की जानी चाहिए थी। हाईकोर्ट ने याची के अधिवक्ता और अपर शासकीय अधिवक्ता को सुनकर अपर सत्र न्यायाधीश द्वारा परिवाद दर्ज करने के आदेश को रद्द करते हुए आरोपी महिला और उसके साथियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना करने का आदेश दिया।
 

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