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हाईकोर्ट ने कमिश्नर के आदेश पर लगाई रोक, निर्माण का अवैध हिस्सा खुद गिराएंगे विजय मिश्र

Wed, 04 Nov 2020 08:56 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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prayagraj news : विधायक विजय मिश्रा का पांच मंजिला भवन। - फोटो : prayagraj
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ज्ञानपुर के विधायक विजय मिश्र के अल्लापुर स्थित आवासीय व व्यावसायिक भवनों के ध्वस्तीकरण के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंडलायुक्त प्रयागराज के आदेश पर रोक लगा दी है। मंडलायुक्त ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण को ध्वस्तीकरण नोटिस पर याची इंद्रकली और रामलली का पक्ष सुनकर पुन: आदेश पारित करने के लिए कहा था। इस आदेश को पीडीए ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
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बुधवार को न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र की कोर्ट में सुनवाई के दौरान रामलली के अधिवक्ता ने कहा कि याची अपने भवन में हुए अवैध निर्माण को स्वयं तोड़ना चाहती है, इसकी अनुमति दी जाए। हाईकोर्ट को स्पेशल जज गैंगस्टर के आदेश की भी जानकारी दी गई। स्पेशल जज गैंगस्टर ने मंगलवार को विजय मिश्र के उक्त दोनों भवनों को गैंगस्टर एक्ट के तहत सीज प्रापर्टी होने के आधार पर उसके स्वरूप में किसी भी प्रकार का परिवर्तन करने पर रोक लगा दी थी।

इस पर अदालत ने रामलली के वकील से इस आशय का हलफनामा मांगा। उनके अधिवक्ता ने कहा कि आर्किटेक्ट से बात कर हलफनामा दाखिल करने के लिए समय दिया जाए। कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए नौ नवंबर तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। तब तक मंडलायुक्त के आदेश पर अमल करने पर रोक लगा दी है।
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विधायक विजय मिश्र का अल्लापुर बाघम्बरी हाउसिंग स्कीम में आवासीय भवन है। साथ ही यहीं विजय टावर के नाम से चार मंजिला व्यावसायिक कॉम्पलेक्स है। दोनों भवन विजय मिश्र की पत्नी रामलली के नाम से हैं। व्यावसायिक कॉम्पलेक्स में उनकी सास रामकली भी हिस्सेदार हैं। प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने दोनों भवनों का निर्माण स्वीकृत मानचित्र के विपरीत होने के आधार पर दिसंबर 2007 में धवस्तीकरण का नोटिस दिया था।

इस आदेश पर पीडीए ने अक्तूबर 2020 में अमल शुरू किया तो इंद्रकली और रामलली ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने याची को ध्वस्तीकरण नोटिस के खिलाफ नियमानुसार मंडलायुक्त के समक्ष अपील दाखिल करने का निर्देश था। मंडलायुक्त ने अपील पर सुनवाई करते हुए नोटिस का तामीला नियमानुसार न होने के आधार पर जोनल अफसर को याची का पक्ष सुनकर आदेश पारित करने के लिए मामला वापस पीडीए के पास भेज दिया। पीडीए ने मंडलायुक्त के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
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