वेदों से आ रही परंपरा को ही कहते हैं हिंदू धर्म
वेदों से आ रही परंपरा को ही हम सनातन और हिंदू धर्म कहते हैँ। हिंदू धर्म यहूदी, ईसाई और इस्लाम से अलग है। हिंदू धर्म में तीन ऋण देव ऋण, ऋषि ऋण एवं पितृ ऋण हैं। इसलिए हम यदि यज्ञ, वेेदों का अध्ययन नहीं करते तो हम इन ऋणों से मुक्त नहीं हो सकते। यह विज्ञान पुणे महाराष्ट्र के डेक्कन कालेज के पूर्व कुलाधिपति प्रो. अरविंद प्रभाकर जामखेडकर ने व्यक्त किए।
हाशिमपुर रोड के महावीर भवन स्थित अरुंधती वशिष्ठ अनुसंधान पीठ में स्वर्गीय अशोक सिंहल की पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित व्याख्यानमाला ‘हिंदू धर्म क्या है और हिंदू कौन है’ में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. अरविंद ने कहा कि विभिन्न लोगों ने हिंदू शब्द की अलग-अलग व्याख्या की। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में यह भी परंपरा रही है कि गृहस्थ आश्रम में होते हुए भी मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। शंकरचार्य ने कहा था कि विभिन्न आगमों का पालन उनके सभी अनुयायी करते रहेंगे।
ऐसा उन्होंने इसलिए कहा क्योंकि कालांतर में सूर्य आगम, गणपति आगम, दक्षिण में कार्तिकेय जैसे विभिन्न आगम आए। इसके पूर्व अरुंधती अनुसंधान पीठ के राष्ट्रीय संयोजक चंद्र प्रकाश ने कहा कि जब कोई नाम शक्तिशाली होता है तब लोग उस शब्द की विभिन्न व्याख्या करने लगते हैं। स्वर्गीय अशोक सिंहल ने भाषा संप्रदाय वर्ग सभी को एक कर स्वामी विवेकानंद के विचारों को राम मंदिर आंदोलन खड़ा करके एक मूर्त रूप दिया। इस अवसर पर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राधाकांत ओझा, गोपाल जी दीक्षित, अशोक तिवारी, अंबरीश, विमल प्रकाश, अजय गुप्ता, आशुतोष श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।