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प्रयागराज : विहिप नेताओं ने लवजिहाद को बताई बड़ी समस्या, श्रद्धा हत्याकांड की न हो पुनरावृत्ति

Fri, 18 Nov 2022 01:43 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

विहिप के प्रांत कार्यालय केसर भवन में आयोजित कार्यक्रम में स्वर्गीय सिंहल की सातवीं पुण्यतिथि के मौके पर संतों की मौजूदगी में तमाम मुद्दों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर विहिप के केंद्रीय संत संपर्क प्रमुख अशोक तिवारी ने अशोक सिंहल को महामानव बताया।
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Prayagraj News : पुण्यतिथि पर अशोक सिंहल को श्रद्धांजलि देते कार्यकर्ता। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों ने लव जिहाद को एक बड़ी समस्या बताया है।  शुक्रवार को विहिप के  अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे स्वर्गीय अशोक सिंहल की पुण्यतिथि के मौके पर संगठन के पदाधिकारियों ने लव जिहाद आदि को रोकने के लिए ठोस रणनीति बनाने की बात कही। ताकि दिल्ली में हुए श्रद्धा हत्याकांड की पुनरावृत्ति देश में कहीं भी न हो। 

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विहिप के प्रांत कार्यालय केसर भवन में आयोजित कार्यक्रम में स्वर्गीय सिंहल की सातवीं पुण्यतिथि के मौके पर संतों की मौजूदगी में तमाम मुद्दों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर विहिप के केंद्रीय संत संपर्क प्रमुख अशोक तिवारी ने अशोक सिंहल को महामानव बताया। कहा कि उनकी संकल्प शक्ति बहुत दृढ़ थी। उन्होंने हिंदू समाज के लिए जो भी कार्य किए हैं वह अतुलनीय हैं।  


उनके प्रयास से गौ माता की रक्षा, वेदों का संवर्धन, सामाजिक समरसता, गंगा की निर्मलता जैसे विषयों ने रफ्तार पकड़ी।  500 वर्ष का पुराना विवाद श्री राम जन्मभूमि मुक्त हुई, यह उन्हीं के प्रयास से संभव हुआ। केंद्रीय संत संपर्क प्रमुख ने कहा कि प्रयागराज में वह संतों से मुलाकात कर लव जिहाद रोकने के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करेें।
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इसके पूर्व प्रांत कार्यालय में सुंदर कांड पाठ का आयोजन हुआ। इसके बाद वेद बटुकों द्वारा हवन भी हुआ। इस अवसर पर सांसद केशरी देवी पटेल, विधायक पीयूष रंजन निषाद, गुरु प्रसाद मौर्य, प्रदेश महिला मोर्चा मंत्री कविता यादव त्रिपाठी, महानगर अध्यक्ष भाजपा गणेश केसरवानी, अवधेश चंद्र गुप्ता, विमल प्रकाश के साथ विहिप प्रांत संगठन मंत्री मुकेश कुमार, रविंद्र मोहन, सुरेश गोयल, अश्विनी मिश्रा आदि मौजूद रहे। 

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वेदों से आ रही परंपरा को ही कहते हैं हिंदू धर्म

वेदों से आ रही परंपरा को ही हम सनातन और हिंदू धर्म कहते हैँ। हिंदू धर्म यहूदी, ईसाई और इस्लाम से अलग है।  हिंदू धर्म में तीन ऋण देव ऋण, ऋषि ऋण एवं पितृ ऋण हैं। इसलिए हम यदि यज्ञ, वेेदों का अध्ययन नहीं करते तो हम इन ऋणों  से मुक्त नहीं हो सकते। यह विज्ञान पुणे महाराष्ट्र के डेक्कन कालेज के पूर्व कुलाधिपति प्रो. अरविंद प्रभाकर जामखेडकर ने व्यक्त किए।


हाशिमपुर रोड के महावीर भवन स्थित अरुंधती वशिष्ठ अनुसंधान पीठ में स्वर्गीय अशोक सिंहल की पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित व्याख्यानमाला ‘हिंदू धर्म क्या है और हिंदू कौन है’ में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. अरविंद ने कहा कि विभिन्न लोगों ने हिंदू शब्द की अलग-अलग व्याख्या की। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में यह भी परंपरा रही है कि गृहस्थ आश्रम में होते हुए भी मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। शंकरचार्य ने कहा था कि विभिन्न आगमों का पालन उनके सभी अनुयायी करते रहेंगे।


ऐसा उन्होंने इसलिए कहा क्योंकि कालांतर में सूर्य आगम, गणपति आगम, दक्षिण में कार्तिकेय जैसे विभिन्न आगम आए। इसके पूर्व अरुंधती अनुसंधान पीठ के राष्ट्रीय संयोजक  चंद्र प्रकाश ने कहा कि जब कोई नाम शक्तिशाली होता है तब लोग उस शब्द की विभिन्न व्याख्या करने लगते हैं। स्वर्गीय अशोक सिंहल ने भाषा संप्रदाय वर्ग सभी को एक कर स्वामी विवेकानंद के विचारों को राम मंदिर आंदोलन खड़ा करके एक मूर्त रूप दिया। इस अवसर पर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राधाकांत ओझा, गोपाल जी दीक्षित, अशोक तिवारी, अंबरीश, विमल प्रकाश, अजय गुप्ता, आशुतोष श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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