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Allahabad High Court : कृत्रिम तालाब बनाकर मूर्ति विसर्जन मामले में फैसला सुरक्षित

Fri, 30 Sep 2022 08:53 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मूर्ति विसर्जन धार्मिक परंपरा एवं देवी भक्तों द्वारा शांति जल लिए जाने से जुड़ी हुई है और किसी भी स्थिति में मूर्ति विसर्जन गांव के गंदे प्राकृतिक तालाब में नहीं किया जा सकता है। जिला प्रशासन शहर से 15 किमी दूर प्राकृतिक तालाब में मूर्ति विसर्जन करा रहा है, जो कि सैकड़ों वर्ष पुराना है।
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allahabad high court - फोटो : social media
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज में मूर्ति विसर्जन को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। पीके राय व अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की खंडपीठ सुनवाई कर रही थी। इसके पूर्व याची की ओर से पेश हुए अधिवक्ता वीसी श्रीवास्तव ने माननीय न्यायालय को बताया कि मूर्ति विसर्जन के संबंध में पूर्व में दिए गए आदेश को मानने के लिए प्रशासन बाध्य है। जब तक कि पूर्व के आदेश को वापस नहीं लिया जाता या संशोधन नहीं किया जाए।

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मूर्ति विसर्जन धार्मिक परंपरा एवं देवी भक्तों द्वारा शांति जल लिए जाने से जुड़ी हुई है और किसी भी स्थिति में मूर्ति विसर्जन गांव के गंदे प्राकृतिक तालाब में नहीं किया जा सकता है। जिला प्रशासन शहर से 15 किमी दूर प्राकृतिक तालाब में मूर्ति विसर्जन करा रहा है, जो कि सैकड़ों वर्ष पुराना है। तालाब का पानी गंदा है और उसमें कई तरह की गतिविधियां होती हैं।


इसकी वजह से तालाब में मूर्तियों का विसर्जन धार्मिक भावनाओं के अनुकूल नहीं है और न ही वहां किया जाना चाहिए। तर्क दिया गया कि प्रशासन कह रहा है कि वह गंगा के किनारे है और वहां गंगा का पानी ले जाया जा रहा है। जबकि, गंगा वहां से काफी दूर हैं। इसलिए गंगा के किनारे काली सड़क पर कृत्रिम तालाब बनाकर मूर्तियों का विसर्जन किया जाए।

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जिला प्रशासन पर कोर्ट के आदेश की अवहेलनाका आरोप
जवाब में सरकारी अधिवक्ता द्वारा कहा गया कि बांध के नीचे की भूमि सेना की है और अंदावा का तालाब गंगा के किनारे है। मूर्ति विसर्जन की तैयारी जिला प्रशासन ने बना ली है। इस पर याची ने न्यायालय को बताया कि पूर्व में भी बांध के नीचे गंगा के करीब कृत्रिम तालाब में बिना किसी रोकटोक के जिला प्रशासन द्वारा मूर्ति विसर्जन कराया गया था। जिला प्रशासन न्यायालय के आदेशों की अवमानना कर रहा है। न्यायालय ने अपने 2014, 2015 और 2021 के आदेश में कहा है कि कृत्रिम तालाब बनाकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गाइडलाइन के अनुसार मूर्ति विसर्जन कराया जाए।


याची की ओर से कहा गया कि पांच अक्तूबर को मूर्ति विसर्जन किया जाना है। समय रहते कोर्ट का आदेश आना जरूरी है। नहीं तो जिला प्रशासन अपनी मनमानी करेगा। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर लिया।
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