इलाहाबाद (ब्यूरो)। दुर्गा पूजा की महाषष्ठी पर सोमवार को पूजा पंडालों में बोधन, आमंत्रण, अधिवास से देवी को आमंत्रित किया गया। ढोल-ताशे, घंटा-घड़ियाल, शंख ध्वनि के बीच प्राण प्रतिष्ठा हुई। पुरोहितों की देखरेख में षष्ठी पूजा के बाद केला के पौधे और जोड़ा बेल के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बोधन आमंत्रण, अधिवास पूजन हुआ।
इसके तहत प्रेम एवं श्रद्धापूर्वक देवी का आह्वान कर उनसे रुकने के लिए प्रार्थना की गई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश स्थापित किया गया। दरभंगा कालोनी पूजा कमेटी, श्री भारद्वाजपुरम दुर्गा पूजा समिति, कर्नलगंज दुर्गा पूजा कमेटी, सिविल लाइंस दुर्गा पूजा कमेटी, करेली दुर्गा पूजा कमेटी, करेलाबाग बारवारी, अतरसुइया, नेतानगर, बाई का बाग, प्रीतम नगर, सुलेमसराय, अल्लापुर बाघम्बरी हाउसिंग स्कीम शिवाजी पार्क, टैगोर टाउन बारबारी, जार्जटाउन बारवारी, साउथ मलाका, नार्थ मलाका दुर्गा पूजा कमेटी, गोल्डेन जुबिली दुर्गा पूजा कमेटी, दारागंज दुर्गा पूजा कमेटी, छावनी दुर्गा पूजा कमेटी, न्यू कैंट, कैंट दुर्गा पूजा कमेटी आकाशवाणी चौराहा आदि पूजा पंडालों में आमंत्रण अधिवास, षष्टी पूजन और महिषासुरमर्दिनी चंडी पाठ हुआ। पूजन के लिए कोलकाता, मुर्शिदाबाद से पुरोहित बुलाए गए हैं।
बंगाली समाज की महिलाओं ने संतान की मंगलकामना के निमित्त षष्टी का व्रत रखा। विधिविधान से देवी की आराधना पूजा, आरती के साथ बच्चों के कल्याण के लिए आशीष मांगा। महिलाओं ने घर में पूजन अर्चन के बाद पूजा पंडालों में देवी आराधना की।
पूजा पंडालों के पास बच्चों के लिए तरह-तरह के झूले, मनोरंजक साधन और खाने-पीने के स्टाल लगाए गए हैं। देवी प्रतिमाएं देखने आए लोगों ने वहां कुछ देर रुककर स्टाल भी देखे और व्यंजनों का लुत्फ लिया। चाट के ठेलों में भीड़ लगी रही।
दुर्गा पूजनोत्सव के तहत महासप्तमी मंगलवार को मंत्रोच्चार के बीच देवी प्रतिमाओं में प्राणप्रतिष्ठा की जाएगी। बंगाली वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव प्रणव कुमार राय बताते हैं कि बांग्ला परंपरा के अनुसार जोड़ा बेल के साथ नवदुर्गा की प्रतीक कला बहू को केला सहित नौ प्रकार के पौधों को संग जोड़कर बनाया जाएगा। जिसमें कोचू मान, अशोक, धान, अनार, हल्दी, बेल, जयंती की डालियां, अपराजिता और पत्ते होंगे। जोड़ा बेल से केले के पौधे को नारी रूप में परिवर्तित किया जाएगा। भोर में ‘कला बहू’ को स्नान कराके वस्त्र धारण कराए जाएंगे। महासप्तमी की पूजा और ‘ऊषा आरती’ के बाद प्राण प्रतिष्ठा और चक्षुदान के विशिष्ट अनुष्ठान किए जाएंगे। जीव प्रतीक कला बहू को घट में आमंत्रित किया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दर्पण में मां के बिंब को स्नान और बीजमंत्र लिख घट से देवी के हृदय में प्राणप्रतिष्ठा की जाएगी। पूजा के बाद आंखों पर बंधी पट्टी खोलकर चक्षुदान कराया जाएगा।