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भ्रष्टाचार पर वीसी ने पीएम, राष्ट्रपति को भेजा पत्र

Fri, 04 Aug 2017 02:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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हॉस्टल विवाद को लेकर कैमरे पर आए इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के वीसी - फोटो : SELF
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति कार्यालय को पत्र भेजकर उनके कार्यकाल से पहले विश्वविद्यालय में हुए भ्रष्टाचार के मामलों से अवगत कराया है। उन्होंने पत्र के जरिये भ्रष्टाचार के कुछ मामले भी गिनाए हैं। इससे पहले भी कुलपति सीएजी को पत्र भेजकर इन मामलों का विशेष ऑडिट कराने की मांग कर चुके हैं। खासतौर पर 2005 से, जब विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा मिला।
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कुलपति ने पीएम और राष्ट्रपति कार्यालय को भेेजे पत्र में बताया है कि उन्होंने 30 दिसंबर 2015 को इविवि में वीसी का पदभार ग्रहण किया था। उनके कार्यकाल से पहले विश्वविद्यालय में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ। शिक्षण एवं शिक्षणेत्तर स्टाफ ने लोन एवं एडवांस के रूप में 35 करोड़ रुपये लिए और पैसा वापस नहीं किया। इसके अलावा विश्वविद्यालय में वेतन एवं अन्य मदों के लिए मिले 912 करोड़ रुपये पत्राचार संस्थान के खाते में ट्रांसफर कर दिए गए जो वित्तीय नियमों के विपरीत है, क्योंकि पत्राचार संस्थान स्ववित्त पोषित है। वहीं, यूजीसी के प्रोजेक्ट एवं ग्रांट के लिए चयनित कई प्रोफेसरों ने अब तक क्लोजर रिपोर्ट तक नहीं लगाई है और न ही यूजीसी की ओर से मिली ग्रांट का उपभोग प्रमाणपत्र दिया है। कुलपति ने अपने पत्र में एक और वित्तीय अनियमितता की बात कही है। उनके मुताबिक कई शिक्षकों को वेतन निर्धारण गलत तरीके से कर दिया गया, जिससे विश्वविद्यालय को बड़े पैमाने पर वित्तीय हानि हुई है। यह मामला तकरीबन दो सौ करोड़ रुपये का है। कुलपति ने पत्र में लिखा है कि इन मामलों के विशेष ऑडिट के लिए वह सीएजी को भी पत्र भेज चुके हैं।

वीसी ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कार्यालय को भ्रष्टाचार के कुछ अन्य मामलों से भी अवगत कराया है। वीसी ने पत्र के माध्यम से बताया है कि एमसीसी कैंपस में एडवांस रिसर्च लैब के लिए 20 लाख रुपये आवंटित हुए थे, लेकिन इस पर दो करोड़ 19 लाख 85 हजार रुपये खर्च कर दिए गए, जो वित्तीय अनियमितता का बड़ा उदाहरण है। यह मामला वर्ष 2014-15 का है। इसके अलावा बिना किसी वित्तीय मंजूरी के गर्ल्स हॉस्टल में एनेक्सी के लिए दो करोड़ 12 लाख 27 हजार और एसएसएल हॉस्टल में एनक्सी के लिए 48 लाख रुपये खर्च किए गए। यह मामला भी वर्ष 2014-15 का है। वहीं, बिल का सत्यापन किए बगैर एलटीसी के मद में 78.28 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया।
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