देश में निर्मित पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत ने समय पर चलने का एक अनोखा कीर्तिमान बनाया है। दिल्ली से कानपुर, प्रयागराज होकर वाराणसी के बीच चलने वाली यह ट्रेन अप्रैल माह में एक सेकंड भी लेट नहीं हुई। इसी माह में ट्रेन 25 दिन समय से पूर्व ही दिल्ली से इलाहाबाद जंक्शन पहुंची। इससे यात्रियों को भी खासी सहूलियत हुई।
सप्ताह में पांच दिन चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस दिल्ली से सुबह छह बजे चलने के बाद दिन में दो बजे वाराणसी पहुंचती है। यह दूरी ट्रेन आठ घंटे में तय करती है। 17 फरवरी को इस ट्रेन की व्यावसायिक यात्रा शुरू हुई थी। शुरुआती कुछ दिनों के दौरान ट्रेन पत्थरबाजों के निशाने पर रहने की वजह से कई दिन लेट भी आई। इसके बाद पत्थरबाजों पर नजर रखने के लिए पिछले माह ही इस ट्रेन में उच्च क्षमता के कैमरे बाहरी हिस्से पर लगाए गए। वंदे भारत पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक है।
इस वजह से रेल मंत्रालय की वंदे भारत पर विशेष निगाहें हैं। एग्जीक्यूटिव और चेयर कार श्रेणी के 16 कोच वाली इस ट्रेन में अप्रैल माह में समयबद्धता की मिसाल कायम की। यह ट्रेन अपने हर सफर पर गंतव्य स्टेशन पर समय से ही पहुंची। उत्तर मध्य रेलवे के पीआरओ डॉ. अमित मालवीय का कहना है कि निश्चित ही यह रेलवे और यात्रियों के लिए बड़ी उपलब्धि है। कहा कि अप्रैल के महीने में इस ट्रेन ने शून्य मिनट की देरी दर्ज की है।
वंदे भारत ने औसत स्पीड में राजधानी, शताब्दी और गतिमान एक्सप्रेस जैसी सुपरफास्ट ट्रेन को पीछे कर दिया है। दिल्ली से इलाहाबाद के बीच यह पहली ऐसी ट्रेन है, जिसकी औसत स्पीड 100 किमी प्रतिघंटे के ऊपर है। गाजियाबाद के बाद छिपियाना बुजुर्ग से उत्तर मध्य रेलवे की सीमा शुरू हो जाती है। यहां से इलाहाबाद जंक्शन आने में इस ट्रेन की औसत स्पीड अब 104 किमी प्रतिघंटा हो गई है। जबकि, उत्तर रेलवे जोन में ट्रेन की औसत स्पीड 76 किमी प्रतिघंटा ही है। ओवर ऑल नई दिल्ली से इलाहाबाद के बीच वंदे भारत की औसत स्पीड 102.79 किमी प्रतिघंटा है। दिल्ली से इलाहाबाद आने में वंदे भारत कुल 6.08 घंटे का समय ले रही है। उधर, डाउन कानपुर शताब्दी की भी औसत स्पीड एनसीआर जोन में 100 किमी प्रतिघंटा हो गई है।