उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) में नवनियुक्त छह सदस्यों में से एक सदस्य के इस्तीफे के बाद आयोग में खलबली मची है। बताया जा रहा है कि इस्तीफा देने वाले सदस्य पहले जिस पद पर तैनात थे, उस पद के मुकाबले सदस्य पर उन्हें कम वेतन मिल रहा है
और इसी आर्थिक नुकसान के मद्देनजर उन्होंने अपना इस्तीफा सौंपा है। अगर शासन की ओर से उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाता है तो आयोग में सदस्यों की संख्या घटकर छह रह जाएगी।
आयोग में सदस्यों के कुल आठ पद हैं। इनमें से सात सदस्यों के रिटायरमेंट के बाद शासन की ओर से छह नए सदस्यों की नियुक्ति की गई थी। नवनियुक्त छह सदस्यों में से एक सदस्य पहले एक विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर तैनात थे।
वह 15-16 साल से प्रोफेसर हैं और उनका वेतन अधिक है। सूत्रों का कहना है कि उन्हें जब सदस्य बनाकर आयोग भेजा गया तो वेतन निर्धारण से वह असंतुष्ट नजर आए। सदस्य पद पर उन्हें जो वेतन मिल रहा है, वह पहले के मुकाबले काफी कम है।
इससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा था और इसी वजह से उन्होंने सदस्य के पद से इस्तीफा दिया है। हालांकि जब तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं होता, तब तक वह आयोग के सदस्य रहेंगे।
अब आयोग के अफसर भी सदस्य के इस्तीफे की बात मान रहे हैं लेकिन इस्तीफा अब तक स्वीकार न होने के कारण कोई भी अफसर खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। अगर उनका इस्तीफा स्वीकार हो जाता है तो शासन से आदेश मिलने के बाद आयोग से उन्हें कार्य मुक्त किया जाएगा।
पीसीएस इंटरव्यू के लिए गठित किए गए पांच बोर्ड
पीसीएस-2016 का इंटरव्यू 10 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है। इसके लिए आयोग ने पांच इंटरव्यू बोर्ड का गठन कर दिया है। इंटरव्यू बोर्ड के अध्यक्ष आयोग के सदस्य होते हैं। एक सदस्य के इस्तीफे के बाद उहापोह की स्थिति बनी हुई है।
आयोग के अध्यक्ष को भी किसी एक बोर्ड की अध्यक्षता की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। इस तरह पांच बोर्ड के गठन के बाद बाकी लोग रिजर्व में होंगे।
इंटरव्यू के दौरान प्रतिदिन हर बोर्ड के अध्यक्ष को बदला जाता है। इसके अलावा आयोग में इन दिनों सीधी भर्ती के तहत भी इंटरव्यू चल रहे हैं। ऐसे में अध्यक्ष समेत सभी सदस्य लगातार व्यस्त रहेंगे।