झूंसी से पकड़े जाने के बाद प्राइमरी शिक्षक सत्यप्रकाश को थाने लाकर पूछताछ शुरू की गई तो उसने चौंकाने वाले खुलासे किए। बताया कि उसने अपने साढू़ के बेटे अभिषेक व बेटी रेणू के लिए पेपर आउट कराने व सॉल्वर बैठाने की डील अजय देव सिंह पटेल निवासी शंकरगढ़ से तय की थी।
शिक्षक पात्रता परीक्षा 2021 के दौरान जिले में पकड़े गए पेपर लीक व सॉल्वर गिरोह का मददगार ‘मास्टरजी’ नाम का शख्स है। उसने ही झूंसी स्थित परीक्षा केंद्र से पकड़े गए प्राइमरी शिक्षक सत्यप्रकाश सिंह को लीक हुए प्रश्नपत्र की कॉपी भेजी थी। यह जानकारी मिलने के बाद से एसटीएफ उसकी भी तलाश में जुट गई है। आशंका इस बात की भी है कि वह मथुरा या शामली में पकड़े गए पेपर लीक गिरोह के संपर्क में रहा हो और वहीं से प्रश्नपत्र की कॉपी उसके पास आई हो। हालांकि अफसरों का कहना है कि उसके पकड़े जाने के बाद ही कुछ स्पष्ट कहा जा सकेगा।
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झूंसी से पकड़े जाने के बाद प्राइमरी शिक्षक सत्यप्रकाश को थाने लाकर पूछताछ शुरू की गई तो उसने चौंकाने वाले खुलासे किए। बताया कि उसने अपने साढू़ के बेटे अभिषेक व बेटी रेणू के लिए पेपर आउट कराने व सॉल्वर बैठाने की डील अजय देव सिंह पटेल निवासी शंकरगढ़ से तय की थी। मास्टरजी के नाम से चर्चित अजयदेव ने ही उसे ठीक सुबह 7.33 मिनट पर लीक हुए प्रश्नपत्र की कॉपी भेजी थी।
इसके लिए ढाई-ढाई लाख रुपये देने की बात तय हुई थी। जिसके मुताबिक, मास्टरजी ने उसके साढ़ू के बेटे अभिषेक की जगह न्याय नगर झूंसी स्थित परीक्षा केंद्र पर अनुराग कश्यप और साढ़ू की बेटी की जगह पर संझारा देवी बालिका विद्यालय रामनगर नैनी परीक्षा केंद्र पर एक अन्य सॉल्वर को बैठाया था। एसटीएफ का कहना है कि मास्टरजी के पास प्रश्नपत्र की कॉपी कहां से आई, इसका पता उसकेपकड़े जाने के बाद ही पता चल सकेगा। उसकी तलाश की जा रही है।
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2009 में मिली थी नौकरी
पूछताछ में आरोपी प्राइमरी शिक्षक ने बताया कि उसे 2009 में बदायूं जनपद स्थित स्कूल में सहायक अध्यापक पद पर नौकरी मिली थी। 2013 में उसका स्थानांतरण हुआ, जिसके बाद उसे करियाखुर्द शंकरगढ़ में तैनाती मिली। कुछ साल पहले उसका संपर्क मास्टरजी उर्फ अजयदेव सिंह पटेल से हुआ और इसके बाद ही उसने उससे पेपर लीक व सॉल्वर बैठाने को लेकर डील की।