ग्रांट मिलने के बाद खरीदी गईं कुर्सियां
31 मार्च 1999 को जब प्रदेश सरकार से पांच लाख रुपये की ग्रांट मिली तो कुर्सियां खरीदी गईं। ऑफिस का किराया चार रुपये प्रति वर्ग फीट था। ग्रांट से किराया चुकाया गया। कर्मचारियों को वेतन बांटा गया। यह ग्रांट दिलाने में प्रदेश के तत्कालीन शिक्षा मंत्री डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उस वक्त हाल यह था कि विश्वविद्यालय के पास अपनी कोई पाठ्य सामग्री नहीं थी। सो, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के साथ समझौता हुआ। इग्नू की अध्ययन सामग्री से उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में पढ़ाई शुरू हुई। जुलाई 1999 में विश्वविद्यालय का पहला ओरिएंटेशन कार्यक्रम हुआ।
15 एकड़ में फैला है मुक्त विश्वविद्यालय
दो कमरों वाला विश्वविद्यालय अब 15 एकड़ में विस्तारित है। इसमें गंगा, यमुना और सरस्वती परिसर हैं। गंगा परिसर में मुख्य प्रशासनिक भवन, अतिथि गृह, मीडिया सेंटर, कुलपति निवास, सरस्वती परिसर में विद्या शाखाएं, केंद्रीय पुस्तकालय एवं अटल प्रेक्षागृह है तो यमुना परिसर में त्रिवेणी सामुदायिक केंद्र और क्षेत्रीय कार्यालय है।
25 साल पहले मुक्त विश्वविद्यालय का न कोई अध्ययन केंद्र था और न ही क्षेत्रीय केंद्र। उत्कर्ष के सफर में मुक्त विश्वविद्यालय के प्रदेशभर में 13 क्षेत्रीय केंद्र और तकरीबन 1400 अध्ययन केंद्र खुल चुके हैं। दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से गांव-गांव शिक्षा की अलख जगाने वाला विश्वविद्यालय अब जेलों में पहुंचकर बंदियों को शिक्षित कर रहा है तो महिला अध्ययन केंद्र के माध्यम से गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में भी जुटा है।
अध्ययन केंद्रों का सन्नाटा तोड़ने की चुनौती
विश्वविद्यालय ने 1400 अध्ययन केंद्र बेशक खोल दिए, लेकिन बड़ी चुनौती यहां का सन्नाटा तोड़ने की है। विभिन्न पाठ्यक्रमों की उबासी मारती अध्ययन सामग्री को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क है कि अध्ययन केंद्रों में शिक्षार्थियों की उपस्थिति अनिवार्य नहीं है। विश्वविद्यालय पाठ्य सामग्री उपलब्ध करा देता है। शिक्षार्थी को कोई समस्या है तो अध्ययन केंद्र में आकर पूछे। अध्ययन केंद्र काउंसलिंग के लिए है, जिसका शेड्यूल भी जारी किया जाता है। इस तर्क के बावजूद शिक्षार्थियों की शिकायत है कि तय शेड्यूल पर केंद्रों में शिक्षक नहीं मिलते। ऐसे अध्ययन केंद्रों का क्या फायदा?
विश्वविद्यालय के महत्वपूर्ण निर्णय
डिजी लॉकर में तीन लाख डिग्रियां
मुक्त विश्वविद्यालय ने वर्ष 2022 से डिजी लॉकर की व्यवस्था शुरू की। इसके तहत विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर पिछले दीक्षांत समारोह तक वितरित की गईं तकरीबन तीन लाख डिग्रियां डिजी लॉकर में अब तक अपलोड की जा चुकी हैं। इसके अलावा डिप्लोमा और प्रमाणपत्र भी अपलोड किए गए हैं। शिक्षार्थियों को अब डिग्री, डिप्लोमा या प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए भटकना नहीं होगा। सबकुछ ऑनलाइन उपलब्ध है।
मार्कशीट, असाइनमेंट...आज से ऑनलाइन पोर्टल पर
रजत जयंती समारोह के अवसर पर बृहस्पतिवार को शिक्षार्थी सूचना प्रबंधन प्रणाली (एलआईएमएस) लागू हो जाएगी। एलआईएमएस ऑनलाइन पोर्टल है, जिसके माध्यम से छात्र अपनी मार्कशीट, डिग्री, असाइनमेंट आदि के बारे में जानकारी ले सकेंगे। पोर्टल पर उपलब्ध लिंक से परीक्षा संबंधी जानकारी भी हासिल की जा सकेगी। इस पोर्टल के जरिये शैक्षिक गतिविधियों से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान संभव होगा।
ऑनलाइन एजूकेशन सेंटर लेक्चर
वर्तमान कुलपति प्रो. सीमा सिंह की पहल पर मुक्त विश्वविद्यालय में ऑनलाइन एजूकेशन सेंटर की स्थापना की गई है। इसके माध्यम से शिक्षक सीधे ऑनलाइन लेक्चर देंगे और प्रदेश के विभिन्न जिलों में रहने वाले शिक्षार्थी सीधे उसे सुन सकेंगे। उन्हें शिक्षकों से संवाद करने का मौका भी मिलेगा। यही नहीं, विश्वविद्यालय ने शिक्षकों के व्याख्यान भी ऑनलाइन अपलोड किए जा रहे हैं। वर्ष 2018 में तत्कालीन कुलपति प्रो. केएन सिंह की पहल पर यह प्रक्रिया शुरू की गई थी। इससे शिक्षार्थियों को ऑनलाइन लेक्चर का लाभ भी मिलने लगा है।
घर तक पहुंचाईं डिग्रियां
विश्वविद्यालय ने शिक्षार्थियों की डिग्रियां उनके घर तक पहुंचाईं। पहले मार्कशीट अध्ययन केंद्रों में भेज दी जाती थीं और डिग्री प्रयागराज में दीक्षांत समारोह के दौरान वितरित की जाती थी। शिक्षार्थी दीक्षांत समारोह में यहां नहीं आ सके तो बाद में आकर डिग्री लेनी पड़ती थी। वर्ष 2010-11 में तत्कालीन कुलपति प्रो. नागेश्वर राव ने निर्णय लिया कि अगर कोई अभ्यर्थी विश्वविद्यालय तक नहीं पहुंच पा रहा है तो रजिस्टर्ड डाक से डिग्री उसके घर पहुंचाई जाए। इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।
रेग्युलर पीएचडी भी
वर्ष 2007 में मुक्त विवि में पीएचडी शुरू की गई थी। 2009 तक प्रवेश लिए और सभी शिक्षार्थियों ने पीएचडी पूरी कर ली है। यूजीसी के निर्देश के बाद वर्ष 2012 से पीएचडी की पढ़ाई बंद हो गई। वर्ष 2018-19 में तत्कालीन कुलपति प्रो. केएन सिंह की पहल पर यूजीसी ने रेगुलर मोड में पीएचडी शुरू करने की अनुमति दे दी है।
कुलपति का इंटरव्यू
अगले साल में एक लाख शिक्षार्थियों के दाखिले का लक्ष्य: कुलपति
मुक्त विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सीमा सिंह का कहना है कि शिक्षार्थियों की संख्या तीन हजार से बढ़कर 70 हजार तक यूं ही नहीं पहुंची, इसके लिए शुरुआती चुनौतियों और संघर्षों के बीच से रास्ता तलाशा है। विश्वविद्यालय से जुड़े हर व्यक्ति को इसका श्रेय जाता है। कुलपति ने भविष्य की कई योजनाएं भी साझा कीं। प्रस्तुत है उनसे बातचीत के कुछ प्रमुख अंश...
विश्वद्यालय से जुड़ी क्या योजनाएं हैं?
शिक्षार्थियों की संख्या हर साल बढ़ रही है। इसके साथ ही मुक्त विश्वविद्यालय की जिम्मेदारियां भी बढ़ती जा रहीं हैं। इस साल 70 हजार शिक्षार्थियों ने प्रवेश लिए हैं। अगले साल आंकड़ा एक लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
पाठ्यक्रमों को रोजगारपरक के क्या प्रयास किए गए?
विश्वविद्यालय की ओर से लगातार इसके प्रयास किए जा रहे हैं। कई रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। पिछले दिनों नाेएडा में मुक्त विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित सम्मेलन में देश की नामी कपंनियाें को आमंत्रित किया गया। सम्मेलन में 25 कंपनियों के साथ विश्वविद्यालय ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। शिक्षार्थियों को रोजगार मुहैया कराने की दिशा में यह बड़ा कदम है।
महिला सशक्तिकरण के लिए कोई योजना?
गांव की महिलाओं को आधी फीस पर पढ़ाया जा रहा है। जो निरक्षर हैं, उनके कौशल संवर्धन के लिए मुक्त विश्वविद्यालय की ओर से नए कौशल विकास केंद्र खोलने जा रहा है। इसके लिए पिछले दिनों प्रदेश सरकार के कौशल विकास केंद्र से विश्वविद्यालय ने एमओयू किया है।
नई शिक्षा नीति के अनुरूप क्या हो रहा है?
जुलाई-2023 से नई शिक्षा नीति के तहत ही प्रवेश लिए जा रहे हैं। इसी आधार पर पाठ्यक्रम, अध्ययन सामग्री, प्रश्नपत्र आदि संशोधित किए जा चुके हैं। आगामी परीक्षाएं नई शिक्षा नीति के तहत ही होंगी।
सामने किस तरह की चुनौतियां देखतीं हैं?
विश्वविद्यालय अब डिजिटलीकरण एवं ऑनलाइन शिक्षा की ओर से बढ़ रहा है। हमारी चुनौती हर आयु वर्ग के शिक्षार्थी को इससे जोड़ने की है।
बोले पूर्व कुलपति...
छूटे विद्यार्थियों को अपने साथ जोड़ें
नई शिक्षा नीति में 50 फीसदी विद्यार्थियों को वर्ष 2035 तक उच्च शिक्षा से जोड़ने का लक्ष्य है। इसमें राजर्षि टंडन जैसे मुक्त विश्वविद्यालयों की भूमिका अहम होगी। मुक्त विवि के 25 साल पूर्ण होना इसकी सफलता का परिचायक है। रजत जयंती के अवसर पर सभी शिक्षार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और अफसरों को बधाई।- प्रो. केएन सिंह
गुणवत्ता पर काम करने की सबसे ज्यादा जरूरत
जब मैं कुलपति था, तब कई अकादमिक गतिविधियों की शुरुआत हुई थी। अब भी दीक्षांत समारोह में दो दानदाता पदक मेधावियों को दिए जाते हैं। विवि को सर्वाधिक जरूरत गुणवत्ता पर काम करने की है। सुनिश्चित करें कि पाठ्यक्रम, असाइनमेंट, अध्ययन सामग्री गुणवत्तापूर्ण हो और मूल्यांकन उच्च कोटि का। इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी पर भी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। विवि आगे बढ़े, यही मेरी कामना। - प्रो. एमपी दुबे