वेणी माधव मंदिर के उत्तराधिकार को लेकर सोमवार को फिर तोड़फोड़ और हंगामा हुआ। इस दौरान अखाड़ों के कुछ संतों ने मंदिर में जबरन घुसने की कोशिश की, लेकिन वहां तैनान पुलिस के जवानों ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान मंदिर के सामने घंटों धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी होती रही। शोर-शराबा करने वाले साधु वेणी माधव मंदिर की मंहत वैभव गिरि के उत्तराधिकार को गलत ठहरा रहे थे।
वेणी माधव मंदिर में 48 घंटे के भीतर सोमवार को दूसरी बार बवाल हुआ। पौष पूर्णिमा पर नगर दर्शन परिक्रमा यात्रा को देखते हुए एसएसपी अजय कुमार ने दोनों पक्षों से बाततीच के लिए मंगलवार का समय दिया था।
इससे पहले सोमवार की दोपहर 12 बजे जैसे ही नगर दर्शन परिक्रमा यात्रा निकली, वहां कुछ अखाड़ों के साधु पहुंचकर मंदिर के भीतर घुसने का प्रयास करने लगे। मुख्य प्रवेश द्वार दोपहर 12 से तीन बजे तक बंद रहता है। ऐसे में हंगामा मचाने वाले संतों ने बगल के दरवाजे से भीतर घुसने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया।
इसके बाद विरोध जताने वाले संत मंदिर के सामने ही धरने पर बैठ गए। शाम तीन बजे के बाद जब नगर परिक्रमा यात्रा वापस मंदिर पहुंची, तब तक दूसरे गुट के साधु-महात्मा और कुछ अन्य लोग वहीं डंटे रहे।
इस बीच दर्शन यात्रा की वापसी के बाद मौके पर पहुंचे जूना अखाड़े के संरक्षक मंहत हरि गिरि ने वेणी माधव मंदिर और मठ को जूना अखाड़े की परंपरा का बताते हुए उससे जुड़े कई प्रमाण भी दिए। पुलिस अफसरों का कहना था कि उनके पास जो भी कागज हों, उसे वह मंगलवार को प्रस्तुत करें, ताकि इस मसले का समाधान निकाला जा सके।
इसके बाद पुलिस की सख्ती पर वह वहां से हटने के लिए मजबूर हुए। धरना देने वाले संतों का कहना था कि वेणी माधव मंदिर महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा का है। ऐसे में उनकी गुरु गद्दी मुक्त कराई जानी चहिए।
वह वेणी माधव मंदिर की महंत वैभव गिरि पर दूसरे समुदाय के व्यक्ति से शादी करने का भी आरोप लगा रहे थे। उधर, महंत वैभव गिरि ने बताया कि बंगलूरू में प्रवास के दौरान उनका विवाह आशीष त्रिपाठी के साथ हुआ था, लेकिन वर्ष 2003 में संबंध विच्छेद हो गया। वर्ष 2007 में दीक्षा लेने के बाद वह मठ की सेवा में लग गईं।