पचदेवरा गांव में रेलवे पटरी के पास मिले युवक के शव को लावारिस में पोस्टमार्टम के लिए भेजने और बिना पहचान कराए अंतिम संस्कार करा देने के मामले में पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। मृतक की पहचान डीहा गांव के 22 वर्षीय अंकित यादव पुत्र अशोक यादव के रूप में होने के बाद परिजन हल्का दरोगा पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं।
25 नवंबर को पचदेवरा गांव के पास रेलवे लाइन किनारे एक युवक का शव मिला था। मौके पर पहुंचे हल्का दरोगा ने शव को अज्ञात मानते हुए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आरोप है कि शव की पहचान कराने का न तो कोई प्रयास किया गया और न ही आसपास के गांवों में सूचना दी गई। तीन दिन बाद शव का लावारिस में अंतिम संस्कार करा दिया गया।
उधर, इसी दिन डीहा गांव का अंकित यादव घर से अचानक लापता हो गया था। परिजनों ने 26 नवंबर को उसके चाचा दूधनाथ यादव के माध्यम से हल्का दरोगा को उसकी गुमशुदगी की सूचना दी थी। इसके बावजूद रेलवे ट्रैक पर मिले अज्ञात शव की पहचान कराने की दिशा में पुलिस की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया
सात दिसंबर को जाकर परिजनों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। बुधवार को सोशल मीडिया पर एक युवक की फोटो देखते ही अंकित के पिता अशोक यादव को अंदेशा हुआ। जांच करने पर पता चला कि 25 नवंबर को पचदेवरा में मिला शव उन्हीं के बेटे का था।
मामला सामने आने के बाद मृतक की मां अपने बेटे के अंतिम दर्शन तक न कर पाने के दर्द से बिलख उठी। वहीं परिजनों ने पुलिस पर बड़ी लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है।
मृतक के पिता अशोक यादव ने डीसीपी यमुनानगर विवेक चंद्र यादव को प्रार्थना पत्र देकर बेटे की मौत की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मी पर कार्रवाई करने की मांग की। मामले ने स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।