इंटरव्यू के बाद एक दिसंबर 2022 को भर्ती का अंतिम चयन परिणाम भी जारी कर दिया गया। अभ्यर्थी अंतिम उत्तरकुंजी जारी करने की मांग कर रहे थे। अभ्यर्थियों को आशंका थी कि परीक्षा में कई सवाल गलत पूछे गए हैं। अभ्यर्थियों ने गलत सवालों पर अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई थी और वे चाहते थे कि आयोग अंतिम उत्तरकुंजी शीघ्र जारी करे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आयोग ने अभ्यर्थियों की आपत्तियों का किस तरह निस्तारण किया।
आयोग ने जब अंतिम उत्तरकुंजी जारी करने में देर की तो अभ्यर्थी अतुल कुमार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दाखिल कर दी। अभ्यर्थी ने याचिका के माध्यम से अपने विषय सिविल इंजीनियरिंग की उत्तरकुुंजी की मांग की थी। अभ्यर्थी को कोर्ट से राहत मिलने पर आयोग ने चार अप्रैल 2022 को पारित न्यायालय के आदेश के अनुपालन में अतुल कुमार को उनके विषय सिविल इंजीनियरिंग प्रथम एवं द्वितीय प्रश्नपत्र की सीरीज ‘सी’ की उत्तरकुंजी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया।
चयन परिणाम आने के आठ माह बाद आयोग की ओर से अभ्यर्थी को सिविल इंजीनियरिंग विषय की जो अंतिम उत्तरकुंजी उपलब्ध कराई गई है, उनके अनुसार इस विषय की परीक्षा में पांच प्रश्न गलत पूछे गए थे। प्रथम एवं द्वितीय प्रश्नपत्र में कुल 125-125 सवाल पूछे गए थे। प्रथम प्रश्नपत्र में सी-सीरीज की उत्तरकुंजी से सवाल संख्या 22 एवं 97 को हटा (डिलीट) दिया गया है। वहीं, द्वितीय प्रश्नपत्र की सी-सीरीज की उत्तरकुंजी से सवाल संख्या दो, 20 और 65 को डिलीट किया गया है।
इस तरह पहले प्रश्नपत्र से दो और दूसरे प्रश्नपत्र से तीन सवाल हटाए गए हैं। यह तो केवल एक विषय का हाल है। इस परीक्षा के माध्यम से मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल एवं कृषि अभियंत्रण विषय में भी भर्ती हुई थी। अभ्यर्थियों को आशंका है कि अन्य विषयों में भी गलत प्रश्न पूछे गए हैं और इसी वजह से आयोग अंतिम उत्तरकुंजी जारी करने में देर कर रहा है। अभ्यर्थी चाहते हैं कि आयोग सभी विषयों की उत्तरकुंजी वेबसाइट पर शीघ्र जारी करे।
एक साल में 180 विशेषज्ञ पैनल से किए जा चुके हैं बाहर
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं में गलत सवाल पूछे जाने के मामले में लगातार सामने आ रहे हैं। पीसीएस की पिछली भर्ती परीक्षाओं की अंतिम उत्तरकुंजी जारी किए जाने के बाद भी गलत सवाल पूछे जाने के मामले सामने आए थे। यही वजह है कि आयोग एक साल के दौरान 180 विशेषज्ञों को बाहर का रास्ता दिखा चुका है। अगस्त 2022 में 80 विशेषज्ञों को पैनल से बाहर किया गया था और कुछ दिनों पहले 100 अन्य विशेषज्ञों को भी पैनल से बाहर कर दिया गया।