बाद में आयोग ने दोनों प्रश्नपत्रों को मर्ज करते हुए एक कर दिया और परीक्षा दो दिन में तीन पालियों में कराने का निर्णय लिया। यह भी नियमों के विपरीत है, क्योंकि आयोग ने विज्ञापन जारी होने के बाद प्रारंभिक परीक्षा के प्रारूप में बदलाव किया। इस तरह आयोग ने पीसीएस और आरओ/एआरओ परीक्षा के विज्ञापन के विपरीत जाकर भर्ती प्रक्रिया के बीच में दो बड़े बदलाव किए, जो अभ्यर्थियों को मंजूर नहीं हैं।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का कहना है कि समिति इसके खिलाफ न्यायालय में याचिका दाखिल करेगी, क्योंकि आयोग ने परीक्षाओं के नोटिफिकेशन से छेड़छाड़ की है, जो नियमों का उल्लंघन है। प्रशांत के मुताबिक राजस्थान में अनुवादक भर्ती के एक मामले में देश की शीर्ष अदालत की ओर से बृहस्पतिवार को जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि भर्ती के बीच में नियम नहीं बदले जा सकते।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने किया छात्रों का समर्थन
पीसीएस एवं आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा दो दिन कराए जाने और नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया लागू के जाने के विरोध में आंदोलन कर रहे छात्राें को इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के महासचिव विक्रांत पांडेय अपना समर्थन दिया है। उन्होंने समर्थन पत्र में कहा है कि परीक्षा नियमों में बेवजह बदलाव कर आयोग अभ्यर्थियों पर अनावश्यक दबाव बढ़ा रहा है। ऐसे में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अभ्यर्थियों के साथ है और उनके संघर्ष का समर्थन करता है। वहीं, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रतियोगी आशुतोष पांडेय ने कहा कि 11 नवंबर को आयोग पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जुटेंगे और आयोग के निर्णय के खिलाफ व्यापक आंदोलन होगा।