ज्यादातर भर्तियों में इसी वजह से विवाद होता है। आयोग जब परिणाम जारी करता है तो उसे अपने स्तर से समकक्ष अर्हता निर्धारित करनी पड़ती है। ऐसे में जो अभ्यर्थी अर्हता के विवाद के कारण छंट जाते हैं वे कोर्ट की शरण में चले जाते हैं। इसी वजह से भर्तियां अटक जाती हैं और अभ्यर्थियों को परिणाम के लिए वर्षों इंतजार करना पड़ता है। पिछले दिनों हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि हर भर्ती में समकक्ष अर्हता का निर्धारण पहले से अनिवार्य किया जाए।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में आयोग ने उन सभी पदों के लिए समकक्ष अर्हता निर्धारित करने के लिए संबंधित विभागों एवं शासन को पत्र भेजा, जिन पदों को लेकर अक्सर अर्हता का विवाद होता है। इनमें एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती, प्रवक्ता भर्ती, समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (आरओ) भर्ती, कृषि सेवा, अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती शामिल है। आयोग के पास इन सभी भर्तियों के लिए रिक्त पदों के अधियाचन आ चुके हैं, लेकिन समकक्ष अर्हता स्पष्ट न होने से भर्ती शुरू नहीं हो पा रही है।
अर्हता स्पष्ट न होने के कारण आयोग ने वर्ष 2023 के कैलेंडर में कई महत्वपूर्ण भर्तियों को शामिल नहीं किया। आयोग के सूत्रों का कहना है कि इस बारे में शासन एवं संबंधित विभागों को कई बार पत्र लिखा जा चुका है, ताकि समकक्ष अर्हता का निर्धारण शीघ्र किया जा सके। यह प्रक्रिया पूरी होते ही संबंधित भर्ती परीक्षाओं का विज्ञापन तुरंत जारी कर दिया जाएगा।