संशोधित उत्तरकुंजी जारी न होने से असमंजस में अभ्यर्थी
उत्तरकुंजी जारी न किए जाने से अभ्यर्थी असमंजस में है। इस मसले पर प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति की ओर से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) के खिलाफ कई दिनों से आंदोलन किया जा रहा है। दर्जनों छात्रों ने आयोग के अध्यक्ष और सचिव को कई बार ज्ञापन देकर संशोधित उत्तरकुंजी जारी किए जाने की मांग भी की, लेकिन आयोग की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।
प्रतियोगी छात्र लगातार यह बात कह रहे हैं कि उत्तरकुंजी जारी न किए जाने से उनका बड़ा नुकसान हो रहा है। संशोधित उत्तरकुंजी जारी होने से छात्र परीक्षा से संबंधित अपनी तैयारियों का बेहतर मूल्यांकन कर पाते हैं।
वे यह जान सकते हैं कि उन्होंने जो प्रश्न हल किए थे, उनमें से कितने सवाल सही और कितने गलत थे, ताकि अगली परीक्षा में कोई गलती न हो। साथ ही संशोधित उत्तरकुंजी जारी होने पर यह भी स्पष्ट हो जाता है कि छात्रों ने जिन प्रश्नों पर आपत्तियां की थीं, उनका निस्तारण हुआ या नहीं।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय का कहना है कि आयोग ने पिछली कई परीक्षाओं की उत्तरकुंजी जारी नहीं की, जिससे प्रतियोगी छात्र असमंजस की स्थिति हैं। अवनीश का आरोप है कि आयोग ने अपने ही निर्णय का उल्लंघन किया और छात्रों को वास्तविकता नहीं बताई। आयोग अगर कोई बदलाव कर रहा है तो छात्रों को भी इससे अवगत कराया जाना चाहिए।
समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का कहना है कि अगर आयोग ने मुख्य परीक्षा के बाद उत्तरकुंजी जारी किए जाने का नया प्रस्ताव पारित किया है तो आयोग उसका भी उल्लंघन का रहा है, क्योंकि पीसीएस-2019 और पीसीएस-2020 का अंतिम चयन परिणाम काफी दिनों पहले घोषित किया जा चुका है, लेकिन प्रारंभिक परीक्षा की संशोेधित उत्तरकुंजी का कोई अता-पता नहीं।