मामले में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक पर हुई थी एफआईआर
योगी सरकार ने वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्तियों की सीबीआई से जांच कराने का निर्णय लिया था। सीबीआई ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती-2010 की प्रारंभिक जांच करने के बाद चार अगस्त 2021 को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ, आयोग के अज्ञात कर्मचारियों व अज्ञात बाहरी व्यक्तियों के विरुद्ध चयन प्रक्रिया में धोखाधड़ी करने के आरोप में सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई थी।
सीबीआई जांच के दौरान किया गया स्थायीकरण
सीबीआई जांच के दौरान ही सचिवालय प्रशासन विभाग ने सचिवालय में नियुक्ति प्राप्त कर चुके अपर निजी सचिवों का स्थायीकरण कर दिया और वरिष्ठता सूची जारी कर दी। सचिवालय प्रशासन विभाग ने इन अपर निजी सचिवों को निजी सचिवों के पद पर प्रोन्नत करने का भी निर्णय ले लिया। इसके विरोध में प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडे व मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडे ने भर्ती घोटाले से नौकरी पाने वाले 32 अपर निजी सचिवों के नाम का खुलासा करते हुए सचिवालय प्रशासन विभाग के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई और सीबीआई जांच पूरी होने तक प्रस्तावित पदोन्नति प्रक्रिया को रोकने का अनुरोध किया, जिसके बाद अब शासन ने महाधिवक्ता से राय मांगी है।