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UPPSC : सीबीआई जांच में घिरे अपर निजी सचिवों की प्रोन्नति पर शासन ने महाधिवक्ता से मांगी राय

Sun, 22 Feb 2026 02:58 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

सीबीआई जांच में घिरे अपर निजी सचिवाें की प्रोन्नति के मामले में शासन ने महाधिवक्ता से राय मांगी है। इनका चयन अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती परीक्षा-2010 के तहत किया गया था।
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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सीबीआई जांच में घिरे अपर निजी सचिवाें की प्रोन्नति के मामले में शासन ने महाधिवक्ता से राय मांगी है। इनका चयन अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती परीक्षा-2010 के तहत किया गया था, जिसमें हिंदी शॉर्टहैंड की परीक्षा में कुछ अभ्यर्थियों के अंक बढ़ाकर सफल घोषित किए जाने की शिकायत पर सीबीआई जांच चल रही है। सीबीआई की ओर से 23 अपर निजी सचिवों को सीबीआई मुख्यालय में तलब कर पूछताछ करने और प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति की ओर से धोखाधड़ी से नौकरी पाने वाले 32 आरोपियों के नामों का खुलासा किए जाने के बाद सचिवालय प्रशासन विभाग ने अपर निजी सचिवों को पदोन्नति देने के मामले में महाधिवक्ता से राय मांगी है।

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इससे पहले शासन ने सीबीआई को एक पत्र लिखकर अपर निजी सचिवाें की प्रोन्नति पर राय मांगी थी, जिसके जवाब में सीबीआई की ओर से कहा गया था कि अपर निजी सचिव-2010 के अभ्यर्थियों की प्रोन्नति से संबंधित मामला पूरी तरह से प्रशासनिक प्रकृति का है और उत्तर प्रदेश सरकार के अधीन है। ऐसे में सीबीआई को इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं करनी है। यह मामला अब भी सीबीआई जांच के अधीन है।विशेष सचिव गौरव वर्मा की ओर से महाधिवक्ता को भेजे गए पत्र में सीबीआई के इस जवाब का हवाला देते हुए और इस मामले में न्याय विभाग एवं कार्मिक विभाग के परामर्श का जिक्र करते हुए अपर निजी सचिवों की प्रोन्नति पर अभिमत मांगा गया है। हालांकि, महाधिवक्ता के निजी सचिव की ओर से पत्र के जवाब में कहा गया है कि इस मामले में परामर्श प्राप्त करने के लिए पत्रावली न्याय विभाग के माध्यम से भेजी जाए।

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मामले में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक पर हुई थी एफआईआर

योगी सरकार ने वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्तियों की सीबीआई से जांच कराने का निर्णय लिया था। सीबीआई ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती-2010 की प्रारंभिक जांच करने के बाद चार अगस्त 2021 को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ, आयोग के अज्ञात कर्मचारियों व अज्ञात बाहरी व्यक्तियों के विरुद्ध चयन प्रक्रिया में धोखाधड़ी करने के आरोप में सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई थी।

सीबीआई जांच के दौरान किया गया स्थायीकरण

सीबीआई जांच के दौरान ही सचिवालय प्रशासन विभाग ने सचिवालय में नियुक्ति प्राप्त कर चुके अपर निजी सचिवों का स्थायीकरण कर दिया और वरिष्ठता सूची जारी कर दी। सचिवालय प्रशासन विभाग ने इन अपर निजी सचिवों को निजी सचिवों के पद पर प्रोन्नत करने का भी निर्णय ले लिया। इसके विरोध में प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडे व मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडे ने भर्ती घोटाले से नौकरी पाने वाले 32 अपर निजी सचिवों के नाम का खुलासा करते हुए सचिवालय प्रशासन विभाग के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई और सीबीआई जांच पूरी होने तक प्रस्तावित पदोन्नति प्रक्रिया को रोकने का अनुरोध किया, जिसके बाद अब शासन ने महाधिवक्ता से राय मांगी है।
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